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एपेक्स में इम्यूनोथेरेपी पर पहली अंतरराष्ट्रीय सीएमई का सफल आयोजन



 19/Dec/25

एपेक्स कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं एपेक्स हॉस्पिटल, वाराणसी द्वारा “विज्ञान से जीवन-रक्षा तक” विषय पर इम्यूनोथेरेपी से संबंधित पहली अंतरराष्ट्रीय सीएमई का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य इम्यूनोथेरेपी में हो रही नवीनतम वैज्ञानिक प्रगति को क्लिनिकल प्रैक्टिस, नर्सिंग की विस्तारित भूमिका तथा रोगियों के बेहतर उपचार परिणामों से जोड़ना रहा। शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. एस. एन. संखवार, निदेशक, आईएमएस-बीएचयू एवं विशेष अतिथि प्रो. डॉ. यू. पी. शाही, पूर्व विभागाध्यक्ष, रेडियोथेरेपी, बीएचयू द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर डॉ. स्वरूप पटेल (निदेशक), डॉ. अंकिता पटेल (निदेशक), प्रो. डॉ. आर. जोहन्सीरानी (प्राचार्य), उप-प्राचार्य प्रो. गीता डी सहित अन्य गणमान्य फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे। अतिथियों ने अपने संबोधन में इम्यूनोथेरेपी को कैंसर उपचार का भविष्य बताते हुए महत्वपूर्ण एकेडेमिक विचार साझा किए। देश-विदेश से ऑनलाइन एवं ऑफ लाइन कुल 800 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

वैज्ञानिक सत्रों के दौरान प्रो. गौरव सिंह ने इम्यूनोपैथोलॉजी के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। एपेक्स हॉस्पिटल, वाराणसी के कंसल्टेंट ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अंकिता पटेल एवं डॉ. गौरव गोस्वामी ने कैंसर उपचार में इम्यूनोथेरेपी की उभरती भूमिका तथा ऑन्कोलॉजी से परे इसके उपयोगों पर चर्चा की। श्री अश्विनराज के., नर्सिंग ऑफिसर, जेआईपीएमईआर, पुंडुचेरी ने क्लिनिकल प्रैक्टिस एवं प्रशासन से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा किए। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में सिबी विनोद (टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई), जॉली जॉनसन (यूएई) एवं शारूमथि वेलमुरुगन (यूके) ने साइड-इफेक्ट मैनेजमेंट, चुनौतियाँ एवं सावधानियाँ, आउटपेशेंट केयर तथा इम्यूनोथेरेपी में नर्सिंग की विस्तारित भूमिका पर वैश्विक अनुभव साझा किए। प्रो. डॉ. शिवासंकारी, आईएमएस-बीएचयू कॉलेज ऑफ नर्सिंग द्वारा देशभर से आमंत्रित फैकल्टी की ओरल पेपर प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया गया एवं सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति की घोषणा की गई। सीएमई का समापन वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ। नर्सिंग फैकल्टी प्रो. शरथ चंद्रन, सहायक प्रो. विनय कुमार, आईवन प्रकाश, संध्या सिंह एवं ग्रेस यूथम एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्रद्धा डोमिनिक के माध्यम से यह सम्मेलन इम्यूनोथेरेपी के क्षेत्र में शोध, शिक्षा एवं क्लिनिकल प्रैक्टिस के एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उभरा।

 


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