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लालकृष्ण आडवाणी के जीवन के 100वें वर्ष पर पीएम मोदी ने साझा कीं यादें, बताया अपना अभिभावक और मार्गदर्शक



 07/Nov/26

विभाजन की पीड़ा से भारतीय राजनीति के शिखर तक के सफर को किया याद, अटल-आडवाणी की जोड़ी और राम मंदिर आंदोलन का भी किया उल्लेख

नई दिल्ली। पूर्व उप प्रधानमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के जीवन के सौवें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साथ जुड़ी आत्मीय स्मृतियां साझा कीं। प्रधानमंत्री ने एक आलेख के माध्यम से आडवाणी के राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक योगदान, वैचारिक प्रतिबद्धता और व्यक्तिगत संबंधों को याद किया। उन्होंने आडवाणी को अपना अभिभावक, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आलेख में 8 नवंबर को विशेष अवसर बताते हुए कहा कि दीपावली के पावन पर्व के साथ आडवाणी के जीवन का यह महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ना इसे और यादगार बनाता है। उन्होंने इस वर्ष भारतीय जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का भी उल्लेख किया।

राजनीति में अभिभावक की तरह मिला मार्गदर्शन

प्रधानमंत्री ने बताया कि सार्वजनिक जीवन में कई दशक पहले उन्हें आडवाणी के संपर्क में आने का अवसर मिला। समय के साथ यह संबंध आत्मीयता में बदल गया। आडवाणी ने उन्हें राजनीति की बारीकियां समझाईं और कठिन परिस्थितियों में अपने अनुभवों के माध्यम से मार्गदर्शन दिया। मोदी ने उनकी वैचारिक स्पष्टता, आत्मविश्वास और सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा को अपनी प्रेरणा बताया।

विभाजन की पीड़ा के बाद शुरू किया नया सफर

आडवाणी के शुरुआती जीवन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि उनका जन्म 8 नवंबर 1927 को हुआ था। वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान उन्हें सिंध में अपना घर और परिचित परिवेश छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने निराशा और कड़वाहट को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और नए सिरे से जीवन की शुरुआत की।

प्रधानमंत्री ने जनसंघ को मजबूत बनाने और भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि आडवाणी ने संगठन को मजबूत आधार दिया और कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियों को तैयार किया।

अटल-आडवाणी की जोड़ी को बताया राजनीतिक मिसाल

प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी के बीच दशकों तक रहे संबंधों को भारतीय राजनीति की अनूठी मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने पांच-छह दशकों तक साथ काम किया। राजनीतिक परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद उनके बीच विश्वास, सम्मान और सहयोग का भाव बना रहा।

आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा के लिए किया संघर्ष

वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को आडवाणी के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए मोदी ने कहा कि उस दौर में वह लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के संघर्ष में अग्रिम पंक्ति में रहे। उनकी पुस्तक 'A Prisoner's Scrap-Book' में आपातकाल के अनुभवों का उल्लेख मिलता है।

वर्ष 1977 में जनता सरकार बनने के बाद आडवाणी को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। बाद में उन्होंने गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में भी देश की सेवा की। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ उनके दृढ़ रुख और देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका को भी याद किया।

सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा का किया जिक्र

आडवाणी के राजनीतिक जीवन के ऐतिहासिक प्रसंगों में सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली गई रथयात्रा का विशेष उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्हें भी इस यात्रा से जुड़ने का अवसर मिला था। उन्होंने यात्रा की परिकल्पना, तैयारियों और संचालन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

मोदी ने कहा कि इस यात्रा ने भारतीय समाज और देश के राजनीतिक विमर्श को नई दिशा दी। उन्होंने बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी और राम मंदिर निर्माण के संकल्प से जुड़े प्रसंगों को भी याद किया। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण को इस लंबे संकल्प की ऐतिहासिक परिणति बताया।

सादगी और अध्ययनशीलता को बताया व्यक्तित्व की विशेषता

प्रधानमंत्री ने आडवाणी की सादगी, अध्ययनशीलता और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरे लगाव की सराहना की। उन्होंने बताया कि आडवाणी को अखबार पढ़ने, इतिहास का अध्ययन करने के साथ सिनेमा और रंगमंच में भी रुचि रही है। उनकी पुस्तक 'My Country My Life' में उनके विचारों और अनुभवों की झलक मिलती है।

मोदी ने सिंधी संस्कृति से उनके जुड़ाव और सिंधु दर्शन पूजा को लोकप्रिय बनाने में उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया। साथ ही उनकी पत्नी कमला आडवाणी के योगदान को याद करते हुए कहा कि लंबे सार्वजनिक जीवन में वह उनकी शक्ति और संबल बनी रहीं।

2024 में मिला भारत रत्न सम्मान

प्रधानमंत्री ने कहा कि कराची में पले-बढ़े आडवाणी ने शायद ही कभी कल्पना की होगी कि उनका जीवन इतनी लंबी और असाधारण यात्रा तय करेगा। राष्ट्र के प्रति उनके योगदान के सम्मान में वर्ष 2024 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

आलेख के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने आडवाणी के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए वैदिक मंगलकामना की- 'जीवेत शरदः शतं, पश्येम शरदः शतं, शृणुयाम शरदः शतम्।'

उन्होंने कामना की कि आडवाणी इसी तरह देशवासियों और कार्यकर्ताओं को अपना स्नेह, मार्गदर्शन और प्रेरणा देते रहें।


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