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सत्ता से टकराने का माद्दा, सच के लिए नौकरी तक छोड़ी... ऐसे हैं मेरे गुरु राजेश गुप्ता

✍️ विकास यादव

 03/Nov/26

आज 3 नवंबर है। आज मेरे गुरु, बनारस के वरिष्ठ पत्रकार एवं वाराणसी प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री राजेश गुप्ता जी का 60वां जन्मदिन है। 60 साल पूरे कर वह 61वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। अगर आज मैं पत्रकारिता में चार शब्द लिख पा रहा हूं, तो सिर्फ इसलिए कि एक दिन उन्होंने मुझे वकालत के पेशे से निकालकर पत्रकारिता में ला दिया था। वकालत की काली कोट उतरवाकर हाथ में कलम थमाने वाले मेरे गुरु को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।

आज के दौर में जब हर हाथ में स्मार्टफोन है, हर कोई पत्रकार है, तब 90 के दशक की पत्रकारिता याद आती है। तब की-पैड फोन भी नहीं था, सोशल मीडिया का नाम भी नहीं था। खबरों का मतलब था सुबह का अखबार 'आज' और शाम का सहारा समय। और सहारा समय मतलब राजेश गुप्ता। हमने पढ़ाई के दिनों में उन्हें टीवी पर तेवरदार पत्रकारिता करते देखा है। क्या हमने, पूरा बनारस उन्हें देखना-सुनना पसंद करता था। वैसा तेवर आज देखने को नहीं मिलता।

वो एक खबर जिसने गद्दी वापस दिला दी

एक किस्सा कभी नहीं भूलता। मायावती के शासनकाल में बसपा समर्थित दबंगों ने कबीरचौरा में कबीर मठ के महंत विवेकदास जी को मठ से बाहर निकालकर फेंक दिया था। महंत जी मठ के बाहर रोते-बिलखते रहे, कोई सुनने वाला नहीं था। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक सबकी जुबान पर ताला था, क्योंकि मायावती के रौब के सामने कोई बोलने को तैयार नहीं था।

उस वक्त राजेश गुप्ता जी अकेले कैमरे के साथ पहुंचे। सहारा समय पर LIVE रिपोर्टिंग शुरू की। उनकी बेबाक पत्रकारिता का तेवर ऐसा था कि खबर लखनऊ तक हिली और दबंगों को मठ छोड़कर भागना पड़ा। उसी शाम महंत विवेकदास फिर से कबीर मठ की गद्दी पर बैठे।

इस खबर की कीमत भी चुकानी पड़ी। चैनल के ऊपर के अधिकारियों को यह तेवर रास नहीं आया और उनका ट्रांसफर बनारस से हैदराबाद कर दिया गया। पर बनारसी अख्खड़ मिजाज के धनी राजेश गुप्ता ने बनारस छोड़ने से बेहतर सहारा समय को ही छोड़ना समझा और इस्तीफा दे दिया।

जिसने देव दीपावली को दुनिया को दिखाया

बहुत कम लोग जानते हैं कि आज जो काशी की देव दीपावली अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है, उसकी पहली तस्वीर दुनिया को राजेश गुप्ता जी ने ही दिखाई थी। 90 के दशक में जब कोई लाइव का सोचता भी नहीं था, उन्होंने सहारा समय पर घाटों पर टिमटिमाते लाखों दीयों और घंटी-घड़ियाल वाली महाआरती को LIVE दिखाया। लोगों को लगा जैसे आकाशमंडल जमीन पर उतर आया हो। उसके बाद ही दिल्ली के बड़े चैनलों को बनारस आना पड़ा।

पत्रकारिता छोड़ने के बाद 2009 में उन्होंने अपना लोकल चैनल 'फुल वॉल्यूम' शुरू किया, जिसका उद्घाटन खुद शबाना आजमी जी ने किया था। तेवर वही रहा। एक बार एक घोटाले की खबर में एक बड़े अखबार के चीफ का नाम आया। दबाव और धमकी भी आई, पर राजेश जी नहीं झुके। नतीजा यह हुआ कि उस चीफ का ही बनारस से ट्रांसफर हो गया।

विरासत जो खून में है

राजेश जी को यह तेवर विरासत में मिला है। उनके दादा स्वर्गीय मोहनलाल गुप्ता उर्फ 'भईया जी बनारसी' 60 के दशक में दैनिक 'आज' के साहित्यिक संपादक थे। वह 'इंदिरा-नेहरू के नाम पाती' कॉलम से सरकार की आंख में आंख डालकर सवाल करते थे। इसके अलावा चेतगंज स्थित अपने घर से ही वह 'समाचार' पत्रिका निकालते थे, जहां अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे लोग जुड़े थे और अटल जी खुद उनसे पत्रकारिता का ककहरा सीखते थे।

आज मेरे गुरु राजेश जी के बारे में लिखने को तो एक किताब भी कम पड़ जाएगी। आज बस इतना ही।

जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं गुरु जी! बाबा काशी विश्वनाथ आपको स्वस्थ रखें, लंबी उम्र दें और आपका तेवर ऐसे ही बना रहे।

आपका शिष्य,
विकास यादव
शिष्य – श्री राजेश गुप्ता
अध्यक्ष, वाराणसी प्रेस क्लब


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