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एक साल में वाराणसी पुलिस ने ध्वस्त किए 59 साइबर गैंग, 283 गिरफ्तार



 03/Nov/26

12,282 साइबर शिकायतों का निस्तारण, ठगी के 28.30 करोड़ रुपये होल्ड और पीड़ितों को लौटाए 5.10 करोड़ रुपये; 15 अवैध कॉल सेंटरों का भी भंडाफोड़

वाराणसी। साइबर अपराधियों के खिलाफ कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विगत एक वर्ष में 59 संगठित साइबर गैंग का पर्दाफाश कर 283 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे 15 अवैध कॉल सेंटरों का भी भंडाफोड़ किया गया। पुलिस ने 12,282 साइबर शिकायतों का निस्तारण करते हुए ठगी की 28.30 करोड़ रुपये की धनराशि होल्ड कराई और विधिक प्रक्रिया के तहत पीड़ितों को 5.10 करोड़ रुपये वापस दिलाए। इसके अलावा साइबर अपराध में इस्तेमाल 10,876 मोबाइल नंबर और 9,462 आईएमईआई नंबर ब्लॉक कराए गए।

पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देशन और पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में साइबर अपराधियों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। पुलिस उपायुक्त (अपराध) के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम पुलिस, साइबर सेल और संबंधित टीमों ने तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्य और सूचनाओं के आधार पर संगठित गिरोहों के नेटवर्क को ध्वस्त किया।

पुलिस आयुक्त ने साइबर क्राइम पुलिस और संबंधित अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा करते हुए कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करने और तकनीकी दक्षता के आधार पर उन्हें आगे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की बात कही।

15 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़, अंतरराष्ट्रीय गिरोह भी पकड़ा

पुलिस ने साइबर ठगी के लिए संचालित 15 अवैध कॉल सेंटरों का पर्दाफाश किया। इन केंद्रों के माध्यम से निवेश पर अधिक मुनाफे का लालच देकर, विदेशी नागरिकों को सरकारी अधिकारी बनकर डराकर और नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की जा रही थी।

इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भी खुलासा किया गया। पुलिस ने एकता नगर, सामनेघाट और कैलाशपुरी में संचालित अवैध सिम बॉक्स सेटअप पर कार्रवाई की। इस दौरान 32 पोर्ट वाले छह सिम बॉक्स बरामद किए गए, जिनमें कुल 192 सिम स्लॉट थे। इनके साथ राउटर, गेटवे, वाई-फाई कैमरे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी मिले। मामले में दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

550 लोगों को साइबर अपराधियों के चंगुल से कराया मुक्त

साइबर अपराधियों द्वारा प्रलोभन देकर मल्टीलेवल मार्केटिंग और अन्य साइबर गतिविधियों में शामिल किए गए 550 लोगों को पुलिस ने सुरक्षित रेस्क्यू कराया। उनके परिजनों और संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर सुरक्षित सुपुर्दगी एवं पुनर्वास की कार्रवाई की गई।

संगठित साइबर अपराध में शामिल अभियुक्तों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 21 आरोपितों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई। इसके अलावा साइबर अपराधियों की गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा रहे 17 चार पहिया वाहनों को बरामद किया गया।

साइबर ठगी की रकम में 47 प्रतिशत की कमी

पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और जागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप वर्ष 2025 की तुलना में वर्ष 2026 में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की धनराशि में 47.02 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं, होल्ड या लियन कराई गई धनराशि में 55.6 प्रतिशत और पीड़ितों को वापस कराई गई रकम में 73.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2026 में साइबर अपराध के मामलों में 219 एफआईआर भी दर्ज की गईं।

साइबर अपराध से बचाव के लिए पुलिस ने स्कूलों, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों और विभिन्न शिविरों में जागरूकता अभियान चलाया। इसके माध्यम से 48 हजार से अधिक लोगों को साइबर ठगी के तरीकों और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। लोगों को जागरूक करने के लिए पंपलेट और पुस्तिकाएं भी वितरित की गईं।

अक्टूबर में दो मामलों में 1.65 करोड़ रुपये होल्ड

अक्टूबर माह में साइबर क्राइम सेल और संबंधित थानों की संयुक्त कार्रवाई में ठगी के दो बड़े मामलों में कुल 1 करोड़ 65 लाख 54 हजार रुपये होल्ड कराने में सफलता मिली।

पहला मामला थाना सिगरा का है। आठ अक्टूबर को अनुभव सिन्हा ने शिकायत दर्ज कराई कि पेट्रोल पंप की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर उनसे एक करोड़ 10 लाख रुपये की ठगी की गई है। साइबर क्राइम सेल ने संबंधित बैंक और साइबर अपराध समन्वय केंद्र से संपर्क कर 75 लाख 77 हजार रुपये होल्ड कराए।

दूसरा मामला थाना भेलूपुर का है। 27 अक्टूबर को डॉ. आशीष कुमार ने शिकायत की कि शेयर बाजार में निवेश के नाम पर उनसे दो करोड़ 99 लाख रुपये की ठगी की गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंकों और साइबर अपराध समन्वय केंद्र के सहयोग से 89 लाख 77 हजार रुपये होल्ड कराए।

अच्छे काम करने वाले पुलिसकर्मियों को मिलेगी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने साइबर क्राइम पुलिस और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे केवल शिकायतों के निस्तारण तक सीमित न रहें, बल्कि संगठित साइबर अपराधी गिरोहों और अवैध कॉल सेंटरों का पर्दाफाश करने पर भी विशेष ध्यान दें।

उन्होंने ब्लाइंड केस और जटिल आपराधिक मामलों का तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर खुलासा करने के निर्देश दिए। साथ ही सोशल मीडिया, आधुनिक तकनीक और डिजिटल साक्ष्यों की बेहतर जानकारी रखने वाले पुलिसकर्मियों को अपनी दक्षता का इस्तेमाल कर प्रभावी परिणाम देने को कहा।

पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने, जटिल मामलों का सफल अनावरण करने और तकनीकी दक्षता प्रदर्शित करने वाले कर्मठ पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। ऐसे पुलिसकर्मियों को भविष्य में थाना प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण दायित्व देने में प्राथमिकता के आधार पर अवसर प्रदान किया जाएगा।


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