वाराणसी। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद संबित पात्रा ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों के आरोपों पर पलटवार किया है। सोमवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि 13 करोड़ वोट चोरी का आरोप पूरी तरह राजनीतिक दुष्प्रचार है। एसआईआर मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने की संवैधानिक प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य पात्र भारतीय नागरिकों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखना और अपात्र नामों को हटाना है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि घुसपैठियों को किसी भी कीमत पर मतदाता बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
संबित पात्रा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में हार का ठीकरा कभी ईवीएम तो कभी चुनाव आयोग पर फोड़ना कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक शैली बन गई है। उन्होंने सवाल किया कि राहुल गांधी 13 करोड़ वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन 2014 से 2025 के बीच कांग्रेस को 56 विधानसभा चुनावों में मिली हार की जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक कमजोरियों पर आत्ममंथन करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रही है।
एसआईआर को भाजपा की राजनीतिक साजिश बताए जाने पर संबित पात्रा ने कहा कि देश में अब तक 12 बार विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया हो चुकी है। इनमें दस बार कांग्रेस के शासनकाल और दो बार भाजपा के शासनकाल में यह प्रक्रिया अपनाई गई। ऐसे में इसे मौजूदा सरकार की नई राजनीतिक पहल बताना तथ्यों की अनदेखी है।
उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने के चार प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि एब्सेंट (अनुपस्थित), शिफ्टेड (स्थायी रूप से स्थानांतरित), डेथ (मृतक) और डुप्लीकेट (दोहरी प्रविष्टि) श्रेणियों के आधार पर सूची की जांच की जाती है। उन्होंने दावा किया कि करीब तीन करोड़ लोग अनुपस्थित श्रेणी में चिह्नित हुए, छह करोड़ लोगों ने फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जुड़वाने की प्रक्रिया अपनाई और छह करोड़ स्थानांतरित मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन अलग-अलग आंकड़ों को जोड़कर 13 करोड़ वोट चोरी का आरोप लगाना जनता को गुमराह करने का प्रयास है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र और देश के संसाधनों पर पहला अधिकार भारतीय नागरिकों का है। घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। एसआईआर का उद्देश्य भी मतदाता सूची में पात्र नागरिकों की पहचान सुनिश्चित करना है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल की 20 विधानसभा सीटों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक मतदाताओं के नाम कटे, उनमें से अधिकांश सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की। ऐसे में मतदाता सूची से नाम हटाकर भाजपा को चुनाव जिताने के आरोप अपने ही तर्कों से कमजोर पड़ते हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर भी संबित पात्रा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला, जबकि भाजपा 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव पहले ही जीत चुकी थी।
उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय वीएस संपत मुख्य चुनाव आयुक्त थे, जिन्हें कांग्रेस शासनकाल में 11 जून 2012 को नियुक्त किया गया था। इसके बावजूद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने बहुमत हासिल किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या उस समय कांग्रेस ने वीएस संपत को भाजपा को चुनाव जिताने के लिए नियुक्त किया था? उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर राजनीतिक आरोप लगाना उचित नहीं है।
कांग्रेस की चुनावी स्थिति पर सवाल उठाते हुए संबित पात्रा ने कहा कि तमिलनाडु में कांग्रेस 59 वर्षों से, पश्चिम बंगाल में 49 वर्षों से, उत्तर प्रदेश में 37 वर्षों से, बिहार में 36 वर्षों से, त्रिपुरा में 33 वर्षों से और ओडिशा में 26 वर्षों से सत्ता से बाहर है। उन्होंने सवाल किया कि इन राज्यों में कांग्रेस की हार के लिए भी क्या एसआईआर और चुनाव आयोग जिम्मेदार हैं? उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक विफलताओं की समीक्षा करनी चाहिए।
एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे और अदालती कार्यवाही का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है। केवल घोषणा पत्र जोड़कर वर्ष 2002 से 2004 के बीच मतदाता सूची में नाम होने से संबंधित जानकारी मांगी गई है।
उन्होंने दावा किया कि जून 2025 से अब तक 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के करीब 2.37 करोड़ युवाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं। इससे युवाओं को मतदाता सूची से बाहर किए जाने के आरोप निराधार साबित होते हैं।
संबित पात्रा ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को बूथ स्तर पर मतदाता सूची की जांच करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करने का अधिकार दिया है। भाजपा के साथ कांग्रेस और सपा के एजेंट भी मतदाता सूची की जांच कर सकते हैं। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम छूटा है या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम जुड़ा है तो उसे सामने लाया जाना चाहिए। केवल आरोप लगाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत नहीं होगी।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और उनकी निष्पक्षता पर उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि पूर्व में चुनाव आयोग के अधिकारियों को पद्म सम्मान, राज्यपाल और मंत्री जैसे पद दिए गए, तब संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल क्यों नहीं उठाए गए?
राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए संबित पात्रा ने कहा कि 2014 से 2025 के बीच कांग्रेस को 56 विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अपनी पार्टी की चुनावी हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, न कि हर बार चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाना प्रत्येक राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन सवाल तथ्यों पर आधारित होने चाहिए। एसआईआर की प्रक्रिया में कहीं कोई त्रुटि है तो उसे सामने लाया जाए, उसका सुधार किया जाएगा। मतदाता सूची की शुद्धता को राजनीतिक विवाद का हथियार बनाना देशहित में नहीं है।
पत्रकार वार्ता में भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष अशोक चौरसिया, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, जिलाध्यक्ष रामसकल पटेल, क्षेत्र उपाध्यक्ष नवरतन राठी, मधुकर चित्रांश, संतोष सोलापुरकर, शैलेंद्र मिश्रा, अमित राय, विपिन सिंह, प्रमील पांडेय और अभिषेक त्रिपाठी सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।