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लिव-इन रिलेशनशिप टूटने से मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गहरा असर, तनाव और अकेलेपन से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय

डॉ. मनोज कुमार तिवारी, वरिष्ठ परामर्शदाता

 30/Oct/26

लिव इन रिलेशनशिप : मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियाँ व समाधान

लिव-इन रिलेशनशिप यानी बिना विवाह के साथ रहने वाले दो बालिग व्यक्तियों का आपसी सहमति पर आधारित संबंध। ऐसे संबंधों में आपसी असहमति, भावनात्मक शोषण या किसी अन्य कारण से अलगाव की स्थिति पैदा होने पर व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ सकता है। लंबे समय तक साथ रहने के बाद रिश्ता टूटने से तनाव, अवसाद, अकेलापन और असुरक्षा जैसी भावनाएं पैदा हो सकती हैं।

तनाव और अवसाद का खतरा

लिव-इन रिलेशनशिप टूटने के बाद शुरुआती महीनों में व्यक्ति मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं का सामना कर सकता है। रिश्ते से जुड़ी यादें, भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भावनात्मक चोट इस परेशानी को बढ़ा सकती हैं।

अकेलेपन और हीन भावना का अहसास

लंबे समय तक साथ रहने के बाद अचानक अकेले हो जाना व्यक्ति के लिए भावनात्मक रूप से कठिन हो सकता है। कई बार इससे आत्मविश्वास में कमी और हीन भावना पैदा होने लगती है।

नींद और दिनचर्या पर असर

अत्यधिक सोचने, घबराहट और भावनात्मक तनाव के कारण नींद प्रभावित हो सकती है। सोने-जागने का समय बिगड़ने के साथ व्यक्ति की नियमित दिनचर्या भी अस्त-व्यस्त हो सकती है।

कामकाज और पढ़ाई में परेशानी

मानसिक उलझन के कारण काम, पढ़ाई और रोजमर्रा की गतिविधियों में ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है। लंबे समय तक यह स्थिति व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है।

पहचान का संकट और नशे की प्रवृत्ति

लंबे समय तक किसी के साथ रहने के बाद रिश्ता समाप्त होने पर व्यक्ति को अपनी अलग पहचान और भविष्य को लेकर असमंजस हो सकता है। कुछ लोग इस भावनात्मक पीड़ा से बचने के लिए सिगरेट, शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सहारा लेने लगते हैं, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर और बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये उपाय

- भावनाओं को स्वीकार करें: दुख, गुस्सा और उदासी महसूस होना स्वाभाविक है। भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें समझने और व्यक्त करने की कोशिश करें। डायरी लिखना भी मददगार हो सकता है।
- परिवार और दोस्तों का सहारा लें: भरोसेमंद लोगों से बातचीत करने से मन का बोझ हल्का हो सकता है।
- प्रोफेशनल मदद लें: यदि तनाव, अवसाद या घबराहट लंबे समय तक बनी रहे अथवा दैनिक जीवन प्रभावित होने लगे, तो मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।
- दिनचर्या नियमित रखें: पर्याप्त नींद, संतुलित खानपान, व्यायाम और पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालें।
- नशे से दूर रहें: भावनात्मक परेशानी से निपटने के लिए शराब, सिगरेट या अन्य नशीले पदार्थों का सहारा लेने से बचें।

लिव-इन रिलेशनशिप में सहमति और सावधानी जरूरी

लिव-इन रिलेशनशिप में दो बालिग व्यक्तियों की आपसी सहमति, सम्मान और भावनात्मक सुरक्षा महत्वपूर्ण हैं। संबंधों में असहमति या अलगाव की स्थिति में किसी भी तरह का दबाव, धमकी अथवा भावनात्मक शोषण व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। भारत में लिव-इन संबंधों को लेकर कानूनी स्थिति विभिन्न परिस्थितियों और न्यायालयों के फैसलों से प्रभावित होती है। इसलिए इसे पूरी तरह कानून से बाहर मानना उचित नहीं है।

रिश्ता चाहे विवाह का हो या लिव-इन का, उसमें आपसी सम्मान, विश्वास और मानसिक सुरक्षा का होना आवश्यक है। संबंध टूटने पर मानसिक परेशानी महसूस होना कमजोरी नहीं है। सही समय पर परिवार, मित्रों और विशेषज्ञों का सहयोग लेकर इस स्थिति से उबरा जा सकता है।

डॉ. मनोज कुमार तिवारी
वरिष्ठ परामर्शदाता
एआरटीसी, एसएस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी

क्लाउन टाइम्स | विशेष लेख


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