सनबीम इंग्लिश स्कूल, भगवानपुर में सोमवार को ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से विद्यार्थियों को परिचित कराने के उद्देश्य से गोटीपुआ ओडिसी नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति आयोजित की गई। ओडिशा के रघुराजपुर से आए दसभुजा गोटीपुआ ओडिसी नृत्य परिषद के कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट नृत्यकला, भावपूर्ण मुद्राओं, लयबद्ध पदसंचालन और आकर्षक कलाबाजियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को गोटीपुआ नृत्य की ऐतिहासिक परंपरा, भगवान जगन्नाथ की भक्ति से उसके गहरे जुड़ाव तथा ओडिसी शास्त्रीय नृत्य के विकास में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। पद्मश्री गुरु मगुनी चरण दास की कलात्मक विरासत को आगे बढ़ाने वाली संस्था के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय नृत्य परंपरा की विशिष्टता, साधना और आध्यात्मिक भावधारा का परिचय दिया।
नृत्य दल का नेतृत्व ग्रुप लीडर एवं मर्दल वादक बटाकृष्ण दास ने किया। उनके साथ गायक भगवान बेहरा, बांसुरी वादक कबीराज प्रधान, मंजीरा वादक नीलकंठ नायक और अन्य प्रतिभाशाली नर्तकों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
पारंपरिक संगीत की मधुर स्वर-लहरियों के बीच कलाकारों के सधे हुए पदसंचालन, संतुलन, चपलता और आकर्षक कलाबाजियों ने प्रस्तुति को विशेष बना दिया। कलाकारों की भावपूर्ण मुद्राओं और लयबद्ध नृत्य ने विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय एवं पारंपरिक नृत्य शैलियों की समृद्धि से परिचित कराया।
कार्यक्रम में विद्यालय के उपप्रधानाचार्य रविकांत मिश्रा, हेडमिस्ट्रेस सुपर्णा तनेजा और अन्य अतिथियों ने कलाकारों का स्वागत एवं सम्मान किया। नृत्य प्रस्तुति के बाद आयोजित संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने कलाकारों से गोटीपुआ नृत्य की ऐतिहासिक परंपरा, पारंपरिक वेशभूषा, वाद्ययंत्रों और इस कला में दक्षता हासिल करने के लिए आवश्यक कठिन साधना से संबंधित प्रश्न पूछे।
कलाकारों के साथ प्रत्यक्ष संवाद ने विद्यार्थियों को इस पारंपरिक नृत्य शैली की विशेषताओं को गहराई से समझने का अवसर दिया। साथ ही, उन्हें भारत की विविध कलात्मक परंपराओं, लोक संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के विभिन्न आयामों को जानने का अवसर भी मिला।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय की प्रधानाचार्या मौसुमी भट्टाचार्य ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कलाकारों, अतिथियों और आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ भारतीय कला, संस्कृति और विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता, सम्मान और जिज्ञासा को प्रोत्साहित किया। ऐसी प्रस्तुतियां विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर भारत की विविध कलात्मक परंपराओं से जोड़ती हैं और सांस्कृतिक विविधता के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक होती हैं।
ओडिशा की समृद्ध गोटीपुआ नृत्य परंपरा की इस मनोहारी प्रस्तुति ने विद्यार्थियों के लिए एक ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और यादगार अनुभव प्रदान किया।