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डलिम्स सनबीम में ‘सिपक मैके’ के तहत गोटीपुआ ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति



 25/Oct/26

पारंपरिक भारतीय शास्त्रीय नृत्य से रूबरू हुए विद्यार्थी, भगवान कृष्ण की लीलाओं और पौराणिक प्रसंगों ने मोहा मन

रोहनिया स्थित डॉ. अमृत लाल इशरत मेमोरियल डलिम्स सनबीम स्कूल एंड हॉस्टल के सभागार में शनिवार को ‘सिपक मैके’ के तहत गोटीपुआ ओडिसी नृत्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय लोक-संगीत एवं नृत्य की समृद्ध परंपराओं से परिचित कराना और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

कार्यशाला में मुख्य कलाकार बटाकृष्ण दास और उनकी टीम ने गोटीपुआ नृत्य की आकर्षक एवं अविस्मरणीय प्रस्तुति दी। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।

महान विभूतियों को अर्पित की गई श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान ‘सिपक मैके’ के उत्तर प्रदेश वाराणसी चैप्टर के समन्वयक उमेश सेठ एवं उनकी पत्नी मृदुला सेठ, विद्यालय की प्रधानाचार्या गुरमीत कौर और प्रशासनिका रितु वाधवा, उप-प्रधानाचार्या सुरभि गुप्ता ने संस्था के संस्थापक डॉ. अमृत लाल इशरत एवं मैडम दीशा इशरत की प्रतिमूर्ति पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया और श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके बाद संस्था के पदाधिकारियों ने मुख्य कलाकार बटाकृष्ण दास, गायक भगवान बेहेरा, बांसुरी वादक कविराज प्रधान और गंजीरा वादक नीलकंठ नायक सहित नृत्य दल के कलाकारों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। कलाकारों में सौम्यरंजन दास, अभिमन्यु नायक, लाबा मरांडी, गणेश गलिक, अमीर मलिक, राहुल डे और कुशना जेना शामिल रहे।

शास्त्रीय नृत्य के संरक्षण में ‘सिपक मैके’ की भूमिका

कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप ‘बाबा’ मधोक, निदेशिका पूजा मधोक और अतिरिक्त निदेशक माहिर मधोक ने अपने संदेश में ‘सिपक मैके’ की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत से जुड़ने तथा इनके प्रचार-प्रसार और संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि ‘सिपक मैके’ भारतीय शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत की परंपराओं को संरक्षित करने, उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

पौराणिक प्रसंगों की प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

मुख्य कलाकार बटाकृष्ण दास ने विद्यार्थियों को गोटीपुआ नृत्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि इस पारंपरिक नृत्य में 5 से 15 वर्ष तक के लड़के प्रस्तुति देते हैं। समय के साथ इस नृत्य को आकर्षक बनाने के लिए इसमें आधुनिक तत्वों को भी शामिल किया गया है।

नृत्य प्रस्तुति के दौरान कलाकारों ने शुंभ-निशुंभ वध, नरसिंह अवतार, द्रौपदी चीरहरण और ग्राह उद्धार जैसे पौराणिक प्रसंगों को भाव-भंगिमाओं एवं नृत्य के माध्यम से जीवंत किया। कलाकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रस्तुति के अंत में मुख्य कलाकार बटाकृष्ण दास ने विद्यार्थियों को नृत्य से संबंधित सूक्ष्म जानकारियां दीं और उनके सवालों के जवाब दिए। विद्यार्थियों की उत्सुकता एवं शास्त्रीय नृत्य के प्रति रुचि देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय की प्रधानाचार्या गुरमीत कौर ने सभी कलाकारों और ‘सिपक मैके’ के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय लोक-नृत्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं।


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