भारतीय वायुसेना के हवाई प्रदर्शन के दौरान दर्शकों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक इंतजाम किए। नमो घाट समेत विभिन्न गंगा घाटों पर मेडिकल टीमें तैनात रहीं। इस दौरान चिकित्सा शिविरों में कुल 142 लोगों को उपचार उपलब्ध कराया गया। वहीं, नमो घाट पर बीमार हुए एक बच्चे को प्राथमिक उपचार के बाद ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसे भर्ती कर इलाज शुरू किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. पी. सिंह के निर्देशन में हवाई प्रदर्शन के दौरान विभिन्न घाटों पर चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए थे। किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे आयोजन के दौरान चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रहीं।
सीएमओ डॉ. एन. पी. सिंह ने बताया कि हवाई प्रदर्शन के दौरान लगाए गए चिकित्सा शिविरों में 142 लोगों को उपचार दिया गया। इनमें निर्जलीकरण यानी शरीर में पानी की कमी, माइग्रेन, गर्मी के कारण थकावट, तीव्र गैस्ट्राइटिस, उल्टी, चक्कर आने और सर्दी-जुकाम से पीड़ित लोग शामिल थे। चिकित्सकीय टीमों ने मरीजों की स्थिति के अनुसार उनकी जांच की और प्राथमिक उपचार के साथ आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराईं।
नमो घाट पर एक बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसे तत्काल प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद जिला प्रशासन के सहयोग और संबंधित विभागों के समन्वय से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। एंबुलेंस के जरिए बच्चे को शीघ्र अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसे भर्ती कर उपचार उपलब्ध कराया गया।
हवाई प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकीय टीमों के साथ एंबुलेंस सेवाओं को भी सक्रिय रखा। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर उन्हें संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाना था।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा शिविरों में आवश्यक संसाधनों के साथ चिकित्सकीय टीमों की तैनाती की गई थी, ताकि दर्शकों को मौके पर ही उपचार मिल सके।
उन्होंने आमजन से अपील की कि ऐसे आयोजनों के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और धूप व गर्मी से बचाव करें। किसी भी प्रकार की अस्वस्थता महसूस होने पर नजदीकी चिकित्सा शिविर में संपर्क करें। गंभीर लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सा सहायता लेने में देरी न करें।