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राम के अयोध्या लौटने की सूचना पर झूम उठे अयोध्यावासी, चारों भाइयों का मिलन देख नम हुईं लीला प्रेमियों की आंखें



 25/Oct/26

रामनगर चौक में रात 11:30 बजे हुआ श्रीराम-भरत मिलाप, भगवान के जयकारों से गूंज उठा पूरा परिसर

 भगवान श्रीराम के प्रति भरत का अगाध प्रेम और अटूट विश्वास ही था कि 14 वर्ष का वनवास पूरा कर प्रभु श्रीराम सकुशल अयोध्या लौटे। भाइयों के बीच प्रेम, त्याग और समर्पण की ऐसी मिसाल आज के युग में दुर्लभ है। इसी भावपूर्ण प्रसंग का सजीव मंचन रामनगर की रामलीला में हुआ। भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और चारों भाइयों के मिलन की लीला देखकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। रात 11:30 बजे रामनगर चौक में श्रीराम-भरत मिलाप की लीला संपन्न हुई। इस दौरान चारों ओर प्रभु श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।

हनुमान ने भरत को सुनाया राम के लौटने का समाचार

लीला के प्रसंग के अनुसार, नंदीग्राम में अपनी पर्णकुटी में बैठे भरत प्रभु श्रीराम की प्रतीक्षा कर रहे थे। वनवास की अवधि पूरी होने में केवल एक दिन शेष था। इसी बीच उनकी दाहिनी आंख बार-बार फड़कने लगी। तभी ब्राह्मण के वेश में हनुमान वहां पहुंचे और उन्हें प्रभु श्रीराम के सकुशल अयोध्या लौटने का समाचार सुनाया।

भरत ने हनुमान से उनका परिचय पूछा। परिचय देने के बाद हनुमान ने उन्हें राम-रावण युद्ध का पूरा वृत्तांत सुनाया। प्रभु श्रीराम के लौटने का समाचार सुनकर भरत भावविभोर हो गए और उन्होंने हनुमान को गले लगा लिया। इसके बाद हनुमान प्रभु श्रीराम के पास लौट गए।

भरत ने अयोध्या पहुंचकर गुरु वशिष्ठ और अपनी माताओं को प्रभु श्रीराम के आगमन की सूचना दी। यह समाचार मिलते ही पूरी अयोध्या में हर्ष और उल्लास छा गया।

चारों भाइयों के मिलन पर भावुक हुए श्रद्धालु

अयोध्या की सीमा में पहुंचने पर प्रभु श्रीराम ने अपने मित्रों के साथ अयोध्या की महिमा का वर्णन किया। इसके बाद उन्होंने पुष्पक विमान से उतरकर उसे वापस कुबेर के पास भेज दिया। गुरु वशिष्ठ ने प्रभु श्रीराम से उनकी कुशलक्षेम पूछी। श्रीराम ने सभी ब्राह्मणों को प्रणाम किया और माताओं के दर्शन कर उनके चरण स्पर्श किए। इसके बाद उन्होंने अयोध्यावासियों से भेंट की।

प्रभु श्रीराम ने अपने साथ आए वानरों और भालुओं का उनके परिजनों से परिचय कराया। इस प्रसंग ने लीला में उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रामनगर चौक में चारों भाइयों का मिलन होते ही श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। पूरा परिसर प्रभु श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।

रामराज्याभिषेक की तैयारियों का आदेश

लीला के अगले प्रसंग में गुरु वशिष्ठ ने ब्राह्मणों से पूछा कि यदि वे प्रसन्नतापूर्वक अनुमति दें, तो प्रभु श्रीराम को सिंहासन पर विराजमान कराया जाए। ब्राह्मणों ने तत्काल इसकी अनुमति दे दी। इसके बाद गुरु वशिष्ठ ने सुमंत को बुलाकर पूर्व की भांति रामराज्याभिषेक की सभी तैयारियां करने का आदेश दिया।

प्रभु श्रीराम ने अपने मित्रों को स्नान कराने के लिए कहा। सभी ने स्नान कर नए वस्त्र धारण किए। इसके बाद अयोध्या रामलीला मैदान में भगवान की आरती हुई और श्रीराम-भरत मिलाप की लीला संपन्न हुई।

रामनगर की इस पारंपरिक लीला में भाईचारे, त्याग, प्रेम और मर्यादा का संदेश देखने को मिला। चारों भाइयों के मिलन का भावपूर्ण दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा।


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