वाराणसी। विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस के अवसर पर एपेक्स हॉस्पिटल के एडवांस्ड जोड़ प्रत्यारोपण एवं स्पाइन सेंटर में दो दिवसीय निःशुल्क बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। एपेक्स के चेयरमैन एवं वरिष्ठ स्पाइन सर्जन प्रो. डॉ. एस.के. सिंह के संरक्षण में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य लोगों को हड्डियों की कमजोरी, ऑस्टियोपोरोसिस और उससे बचाव के प्रति जागरूक करना था। शिविर में कुल 280 लोगों ने निःशुल्क बीएमडी जांच कराई और चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त किया।
जांच में चार में से तीन लोगों में मिले हड्डियों की कमजोरी के लक्षण
शिविर के दौरान की गई जांच में चार में से तीन व्यक्तियों में ऑस्टियोपोरोसिस या ऑस्टियोपीनिया के लक्षण पाए जाने की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों के अनुसार, ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर और भंगुर हो जाती हैं, जबकि ऑस्टियोपीनिया में हड्डियों का घनत्व सामान्य से कम होने लगता है। समय रहते इन स्थितियों की पहचान होने से उचित चिकित्सकीय परामर्श और जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से हड्डियों से जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
अनियमित दिनचर्या और पोषण की कमी से युवाओं पर भी खतरा
विशेषज्ञों ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। अनियमित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों की कमी और पौष्टिक आहार का अभाव कम उम्र के लोगों में भी हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। महिलाओं में भी ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम अधिक पाया जाता है। ऐसे में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के प्रति जागरूक रहना जरूरी है।
मामूली चोट से भी हो सकता है फ्रैक्चर
शिविर में मौजूद चिकित्सकों ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित व्यक्तियों की हड्डियां इतनी कमजोर हो सकती हैं कि मामूली चोट या गिरने से भी फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होने पर गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने जोड़ों में दर्द, हड्डियों की कमजोरी और स्पाइनल फ्रैक्चर से बचाव के लिए समय पर जांच कराने तथा चिकित्सकीय सलाह लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि नियमित बीएमडी जांच, कैल्शियम एवं विटामिन-डी की पर्याप्त उपलब्धता, संतुलित पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम हड्डियों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, कैल्शियम और विटामिन-डी की खुराक व्यक्ति की जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श से ही लेनी चाहिए।
विशेषज्ञों की टीम ने किया परामर्श
शिविर में स्पाइन सर्जन डॉ. अमन वर्मा, स्पाइन सर्जरी एवं आर्थ्रोप्लास्टी के सीनियर रेजिडेंट डॉ. नितिन चौधरी और डॉ. वैभव अधूलिया, क्लीनिकल असिस्टेंट डॉ. प्रवेश तथा जूनियर रेजिडेंट डॉ. अमित और डॉ. अपूर्व ने जांच एवं परामर्श में योगदान दिया। चिकित्सकों ने जांच में ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपीनिया के लक्षण पाए गए लोगों को हड्डियों की कमजोरी से संबंधित जानकारी दी और बचाव के उपाय बताए।
शिविर के सफल आयोजन में एडवांस्ड जोड़ प्रत्यारोपण एवं स्पाइन सेंटर की चिकित्सकीय, नर्सिंग, तकनीकी और सहयोगी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। शिविर के माध्यम से लोगों को हड्डियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और समय रहते आवश्यक जांच कराने का संदेश दिया गया।