रविवार को पंचवटी मैदान पर रामलीला के दौरान हाथी के बेकाबू होने से अफरा-तफरी मच गई थी। हाथी ने देर रात तक लोगों को दहशत में रखा। उसे नियंत्रित करने के लिए गोरखपुर चिड़ियाघर से चिकित्सकों की टीम बुलाई गई। टीम ने ट्रैंक्विलाइजर के माध्यम से जाइलाजीन दवा दी, जिसके बाद हाथी सुस्त पड़ा और उसे नियंत्रित किया जा सका।
इसके बाद हाथी को लंका क्षेत्र से हटाकर ट्रक के जरिए बाऊ साहब के बगीचे में पहुंचाया गया। वहां वन विभाग की टीम, हाथी का मालिक और कर्मचारी उसकी निगरानी कर रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, हाथी की हालत अब सामान्य बताई जा रही है।
हाथी के उत्पात के चलते रविवार को रामलीला को स्थगित करना पड़ा था। शाम से ही लीला के आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। रामलीला प्रेमियों के बीच हाथी की घटना ही चर्चा का प्रमुख विषय रही।
दहशत को देखते हुए रामलीला के मुख्य पात्रों को भी लीला स्थल पर ले जाने के बजाय अशोक वाटिका के पीछे स्थित भवन में रखा गया था। रात करीब नौ बजे किले से सूचना मिलने के बाद कि साढ़े नौ बजे आरती होगी, स्वरूपों को लीला स्थल पर लाया गया। कुंअर अनंत नारायण सिंह के निर्देश पर आरती कराई गई। रविवार की स्थगित लीला को सोमवार को समायोजित कर कराया गया।
रविवार की यह घटना रामनगर की रामलीला के इतिहास में एक असामान्य घटनाक्रम के रूप में दर्ज हो गई।
घटना के बाद रामलीला में हाथियों के प्रयोग और उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इससे पहले वर्ष 2013 में भी हाथियों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे थे। उस समय वन विभाग ने अनुमति के बिना हाथियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था और कुंअर ने हाथी की सवारी बंद कर दी थी। इस फैसले के बाद कई दिनों तक लीला प्रभावित हुई थी।
उस समय रामलीला प्रेमियों ने प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई थी और रामनगर किले के समर्थन में खड़े हो गए थे। अंततः प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे।
चंदौली के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) शिव शंकर रवींद्रन से हाथियों के इस्तेमाल पर रोक के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने ऐसी किसी रोक के आदेश से इनकार किया। उनका कहना था कि रविवार की घटना के बाद लोगों में भय का माहौल था। ऐसे में दुर्ग प्रशासन ने अपनी ओर से कोई निर्णय लिया होगा। उन्होंने यह भी कहा कि हाथी विभिन्न स्थानों पर पूजा, त्योहारों और जुलूसों में शामिल होते हैं।
वहीं, थाना प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा ने भी रामलीला में हाथियों के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने की बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। जनता भयमुक्त होकर रामलीला देख सके, इसी उद्देश्य से दुर्ग प्रशासन ने निर्णय लिया होगा।
रविवार की घटना के बाद सोमवार को रामलीला में हाथियों की अनुपस्थिति और कुंअर अनंत नारायण सिंह द्वारा कार में बैठकर लीला देखने का घटनाक्रम चर्चा में रहा। अब इस घटना के बाद रामलीला में हाथियों के इस्तेमाल, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की तैयारियों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।