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बनारस के कर्णघंटा की कागज-कॉपी मंडी से जुड़ी जगमग इंडस्ट्रीज का संचालक राहुल गुप्ता के कैंट में रिहायशी मकान से 30 कुंतल पटाखा बरामद



 17/Oct/26

प्लास्टिक गिलास-चम्मच के कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठान के संचालक के यहां पटाखों की बरामदगी; शहर में आठ-नौ गोदाम और करोड़ों के कारोबार के दावों की जांच जरूरी

वाराणसी। दीपावली से पहले पटाखों के भंडारण को लेकर वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस की कार्रवाई के बाद शहर में पटाखा कारोबार की गतिविधियां चर्चा में हैं। थाना कैंट क्षेत्र की कुंज विहार कॉलोनी में 16 अक्टूबर 2026 की रात पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर एक रिहायशी मकान से लगभग 30 कुंतल पटाखे बरामद किए। पुलिस की प्रेस-विज्ञप्ति के अनुसार, मौके पर मौजूद राहुल गुप्ता पुत्र श्यामसुंदर गुप्ता, निवासी बी-1001, वरुणा गार्डन, थाना कैंट, वाराणसी से पटाखों के भंडारण का वैध लाइसेंस मांगा गया, लेकिन वह लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सके। पुलिस ने बरामद पटाखों को कब्जे में लेकर अभियोग पंजीकृत करने और अन्य आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।

पुलिस की छापेमारी का वीडियो देखिए

दोस्तों, जैसा कि आप इन दृश्यों में देख सकते हैं, कैंट थाना क्षेत्र की कुंज विहार कॉलोनी में पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। पुलिस की प्रेस-विज्ञप्ति में बरामद पटाखों की मात्रा लगभग 30 कुंतल बताई गई है। मौके पर मौजूद राहुल गुप्ता वैध भंडारण लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सके। रिहायशी मकान में इतनी बड़ी मात्रा में पटाखों की बरामदगी जनसुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है। अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि पटाखे कहां से लाए गए थे और उनके भंडारण तथा वितरण से जुड़े दस्तावेज क्या हैं।

कर्णघंटा की कागज-कॉपी मंडी और जगमग इंडस्ट्रीज का नाम

उपलब्ध कारोबारी जानकारी के अनुसार, राहुल गुप्ता का नाम कर्णघंटा की कागज-कॉपी मंडी में प्लास्टिक के गिलास, चम्मच और अन्य सामान के कारोबार से भी जोड़ा जाता है। बताया जाता है कि यह कारोबार जगमग इंडस्ट्रीज नाम से संचालित होता है। कैंट में पटाखों की बड़ी खेप बरामद होने के बाद संबंधित कारोबारी गतिविधियों और पटाखों के भंडारण के बीच संबंध की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, फर्म के स्वामित्व और उसके पटाखा कारोबार से संबंध की स्वतंत्र दस्तावेजी पुष्टि अभी आवश्यक है।

शहर में आठ-नौ गोदाम और 10 करोड़ के कारोबार का दावा

कारोबारी सूत्रों से मिली अपुष्ट जानकारी में दावा किया जा रहा है कि शहर में आठ से नौ गोदाम हो सकते हैं और कारोबार का मूल्य करीब 10 करोड़ रुपये तक है। आजमगढ़, जौनपुर समेत पूर्वांचल के अन्य क्षेत्रों तक कारोबार फैले होने की भी चर्चा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की प्रेस-विज्ञप्ति में अन्य गोदामों से बरामदगी या किसी व्यापक कारोबारी नेटवर्क की पुष्टि नहीं की गई है।

यदि अन्य गोदामों की जानकारी सामने आती है, तो यह जांचना जरूरी होगा कि वहां किस प्रकार का सामान रखा जाता है, क्या उसके लिए आवश्यक लाइसेंस हैं और भंडारण संबंधी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं। पटाखों की आपूर्ति के स्रोत और वितरण से जुड़े अभिलेख भी जांच के महत्वपूर्ण बिंदु हो सकते हैं।

कर्णघंटा की सकरी गली में एक और कथित गोदाम की चर्चा

दोस्तों, अब इन दृश्यों को भी देखिए। थाना चौक क्षेत्र के कर्णघंटा की सकरी गली में स्थित एक चार मंजिला इमारत को लेकर सूत्रों से अपुष्ट जानकारी मिली है। दावा किया जा रहा है कि इस भवन में राहुल गुप्ता से संबंधित एक गोदाम हो सकता है और संबंधित स्थान बंद रहता है। हालांकि, भवन के स्वामित्व, उसके वास्तविक उपयोग और वहां पटाखों के भंडारण की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की प्रेस-विज्ञप्ति में इस कथित गोदाम का उल्लेख भी नहीं है।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या संबंधित विभाग इस सूचना का सत्यापन करेंगे? यदि वहां किसी प्रकार की विस्फोटक या ज्वलनशील सामग्री रखी जाती है, तो उसके लाइसेंस, सुरक्षा व्यवस्था और भंडारण की वैधता की जांच की जानी चाहिए। फिलहाल इस स्थान को अवैध पटाखा गोदाम कहना उचित नहीं होगा; वास्तविक स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

बनारस के पटाखा कारोबार में वैध व्यापार और भंडारण की जांच का सवाल

दोस्तों, कुल मिलाकर बनारस में पटाखों का कारोबार करोड़ों रुपये का बताया जाता है। वैध पटाखा कारोबार से जुड़े नामों में जेनिथ एजेंसी, मां अंबे स्पार्कर्स से जुड़े दिलीप मोटवानी और तरुण मोटवानी तथा आसिफ पटाखा वाले का भी उल्लेख किया जाता है। इन कारोबारियों के वास्तविक कारोबार का वार्षिक मूल्य अलग-अलग हो सकता है, लेकिन उसके प्रमाणित आंकड़े उपलब्ध हुए बिना किसी निश्चित रकम का दावा करना उचित नहीं होगा।

दूसरी ओर, दालमंडी और हाड़हा सहित शहर के अन्य इलाकों में पटाखा कारोबार से जुड़े बाबा खान, राजू खान और छेदी के कारोबार तथा भंडारण व्यवस्था को लेकर भी किसी विशिष्ट शिकायत या प्रमाण के आधार पर जांच की जा सकती है। इसी क्रम में कैंट में लगभग 30 कुंतल पटाखे बरामद होने के मामले में राहुल गुप्ता का नाम सामने आया है। हालांकि, इन सभी कारोबारियों के बीच किसी संगठित नेटवर्क या अवैध गतिविधि का संबंध स्थापित करने के लिए स्वतंत्र साक्ष्य आवश्यक हैं।

वैध कारोबारियों के हित और जनसुरक्षा दोनों महत्वपूर्ण

पटाखों के कारोबार में लाइसेंस, सुरक्षित भंडारण और निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य महत्व रखता है। जो कारोबारी नियमों के अनुसार व्यापार करते हैं, उनके लिए भी यह जरूरी है कि बाजार में सभी पर समान नियम लागू हों। यदि कहीं बिना आवश्यक अनुमति के पटाखों का भंडारण किया जा रहा है, तो संबंधित विभागों को शिकायतों और सत्यापित सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।

रिहायशी इलाकों में बड़ी मात्रा में पटाखों का भंडारण आग या विस्फोट की स्थिति में आसपास रहने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए जांच केवल बरामद माल तक सीमित न रहकर उसके स्रोत, आपूर्ति के दस्तावेज, भंडारण स्थल की उपयुक्तता और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था तक पहुंचनी चाहिए।

पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई

पुलिस उपायुक्त, वरुणा जोन के कार्यालय से 16 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस-विज्ञप्ति के मुताबिक, यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट वाराणसी के आदेश के क्रम में चलाए जा रहे अभियान के तहत हुई। पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन और अपर पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन के पर्यवेक्षण तथा सहायक पुलिस आयुक्त कैंट के निर्देशन में थाना कैंट पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।

प्रेस-विज्ञप्ति में अभियुक्त की पहचान राहुल गुप्ता पुत्र श्यामसुंदर गुप्ता, निवासी बी-1001, वरुणा गार्डन, थाना कैंट, वाराणसी के रूप में दी गई है। बरामदगी का स्थान कुंज विहार कॉलोनी, थाना कैंट क्षेत्र बताया गया है। विज्ञप्ति पर सोशल मीडिया सेल, पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन, पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी का उल्लेख है। अधिकारियों के व्यक्तिगत नाम प्रेस-विज्ञप्ति में नहीं दिए गए हैं।

अब जांच के निष्कर्षों पर निगाह

कैंट में लगभग 30 कुंतल पटाखों की बरामदगी के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जांच में पटाखों के स्रोत, भंडारण के दस्तावेज और संभावित अन्य गोदामों के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं। कर्णघंटा के कथित गोदाम और पूर्वांचल में कारोबार के विस्तार संबंधी दावों की भी पुष्टि होना बाकी है।

यदि जांच केवल एक बरामदगी तक सीमित रही और अन्य सत्यापित सूचनाओं की पड़ताल नहीं हुई, तो अवैध भंडारण पर प्रभावी अंकुश लगाने की चुनौती बनी रह सकती है। इसलिए जरूरी है कि पुलिस और संबंधित विभाग उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करें, जनसुरक्षा सुनिश्चित करें और जहां नियमों का उल्लंघन प्रमाणित हो, वहां नियमानुसार कार्रवाई करें।
कैंट क्षेत्र में 30 कुंतल पटाखों की बरामदगी हो चुकी है। अब देखना यह है कि जांच में केवल इसी स्थान तक कार्रवाई सीमित रहती है या अन्य सत्यापित सूचनाओं और संभावित भंडारण स्थलों की भी पड़ताल होती है। बनारस के पटाखा कारोबार में नियमों का पालन, वैध व्यापारियों के हित और आम जनता की सुरक्षा—तीनों महत्वपूर्ण हैं। आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर Clown Times की नजर बनी रहेगी।


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