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Ramnagar Ki Ramleela: मेघनाद ने लक्ष्मण पर छोड़ा ब्रह्मास्त्र, संजीवनी से लौटे प्राण



 16/Oct/26

श्रीराम ने लंका को चारों ओर से घेरने की बनाई रणनीति, लक्ष्मण के मूर्छित होने पर सेना में छाया शोक

रामनगर। रावण अहंकार में इतना डूबा था कि उसने अपनी पत्नी की सलाह तक नहीं मानी। भाई विभीषण ने समझाया तो उसे लंका से ही निकाल दिया। श्रीराम की ओर से युद्ध टालने का अंतिम प्रयास भी विफल होने के बाद धर्म और अधर्म के बीच निर्णायक युद्ध शुरू हो गया।

रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के 22वें दिन श्रीराम ने लंका के चारों द्वारों को घेरने की रणनीति बनाई। जामवंत के साथ विचार-विमर्श के बाद नील को पूर्वी द्वार, अंगद को दक्षिणी द्वार और हनुमान को उत्तरी द्वार की जिम्मेदारी सौंपी गई, जबकि श्रीराम और लक्ष्मण ने मध्य भाग में मोर्चा संभाला। राम की सेना ने लंका को चारों ओर से घेर लिया। यह देखकर रावण ने कहा कि सभी काल की प्रेरणा से यहां आए हैं।

इसके बाद दोनों सेनाओं के बीच भीषण युद्ध शुरू हो गया। बड़ी संख्या में राक्षस और वानर मारे गए। रावण के हितैषी माल्यवान ने भी उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन अहंकार में डूबे रावण ने उसे भी अपने सामने से चले जाने को कह दिया।

युद्ध में राक्षस सेना की हालत बिगड़ती देख मेघनाद रणभूमि में पहुंचा और वानर सेना पर कहर बनकर टूट पड़ा। लक्ष्मण के युद्धभूमि में उतरने पर मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, जिससे लक्ष्मण मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े। लक्ष्मण को इस अवस्था में देखकर श्रीराम की सेना में शोक छा गया।

विभीषण की सलाह पर हनुमान सुषेण वैद्य को लेकर आए। सुषेण वैद्य ने बताया कि धौलागिरि पर्वत पर मिलने वाली संजीवनी बूटी से ही लक्ष्मण के प्राण बचाए जा सकते हैं। हनुमान संजीवनी की तलाश में निकल पड़े। रास्ते में रावण की ओर से भेजे गए कालनेमि से उनका सामना हुआ। कालनेमि का सामना करने के बाद हनुमान धौलागिरि पर्वत पहुंचे, लेकिन संजीवनी बूटी की पहचान नहीं कर सके। ऐसे में वह पूरा पर्वत ही उठाकर चल पड़े।

अयोध्या के ऊपर से गुजरते समय भरत ने हनुमान को राक्षस समझकर बाण चला दिया, जिससे वह नीचे गिर पड़े। हनुमान के मुख से श्रीराम का नाम सुनकर भरत को अपनी भूल का एहसास हुआ। इसके बाद हनुमान ने उन्हें पूरी घटना बताई और संजीवनी लेकर पुनः श्रीराम की सेना की ओर चल पड़े।

इधर लक्ष्मण के मूर्छित होने से व्याकुल श्रीराम विलाप कर रहे थे। तभी हनुमान संजीवनी सहित वहां पहुंचे। सुषेण वैद्य ने संजीवनी बूटी का प्रयोग कर लक्ष्मण की मूर्छा दूर की। होश में आने के बाद लक्ष्मण श्रीराम के गले लग गए। इसके साथ ही सेना में खुशी लौट आई। आरती के बाद 22वें दिन की रामलीला को विश्राम दिया गया।


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