प्रशिक्षण के दौरान NDRF के जवानों ने नाविकों को तैराक और गैर-तैराक व्यक्तियों को सुरक्षित बचाने, लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय और रस्सियों के इस्तेमाल तथा उपलब्ध संसाधनों से अस्थायी तैरने वाले उपकरण और स्ट्रेचर तैयार करने की जानकारी दी। इसके साथ ही डूबने से प्रभावित व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देने, कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR), रक्तस्राव नियंत्रित करने और सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार के उपायों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
कार्यक्रम में नाविकों को आकाशीय बिजली की पूर्व चेतावनी के लिए दामिनी ऐप तथा आपदा संबंधी चेतावनियों और अलर्ट के लिए सचेत ऐप की उपयोगिता बताई गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य नाविकों को जल संबंधी आपात स्थितियों में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने और गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं व आम नागरिकों की सुरक्षा में सहयोग करने के लिए सक्षम बनाना था।
कार्यक्रम के समापन पर कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट और वाराणसी के उप जिलाधिकारी (सदर) ने प्रतिभागी नाविकों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र, टी-शर्ट और खाद्य पैकेट वितरित किए। NDRF की इस पहल को आपदा प्रबंधन के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने, स्थानीय समुदाय को प्रशिक्षित करने और आपात परिस्थितियों में बहुमूल्य जीवन बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्लाउन टाइम्स | वाराणसी