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वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब होने की खबर भ्रामक, मंदिर न्यास ने दी सफाई



 14/Oct/26

अप्रैल 2026 में क्षतिग्रस्त हुआ था गर्भगृह के ऊपर स्थापित शिखर, मंदिर के लॉकर में सुरक्षित रखा गया हिस्सा; संरक्षण और मरम्मत के लिए IIT मद्रास की टीम नवंबर में फिर करेगी निरीक्षण

वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब होने और उसके क्षतिग्रस्त होने को लेकर सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और समाचार पत्रों में प्रसारित खबरों पर मंदिर न्यास ने स्पष्टीकरण जारी किया है। न्यास के अनुसार, अप्रैल 2026 में श्री काशी विश्वनाथ धाम के मुख्य मंदिर के गर्भगृह के ऊपर वायव्य कोण पर स्थापित शिखर क्षतिग्रस्त हुआ था। शिखर के क्षतिग्रस्त हिस्से को मंदिर के लॉकर में सुरक्षित रखा गया है। न्यास ने सोना गायब होने संबंधी खबरों को निराधार और भ्रामक बताया है।

शिखर के संरक्षण के लिए IIT मद्रास से लिया जा रहा तकनीकी परामर्श

मंदिर न्यास के अनुसार, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर धार्मिक महत्त्व के साथ-साथ ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसलिए मंदिर के शिखर के संरक्षण और मरम्मत के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास से तकनीकी परीक्षण और विशेषज्ञ परामर्श प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है।

इसी क्रम में IIT मद्रास की विशेषज्ञ टीम ने मंदिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण किया था और जुलाई 2026 में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में प्राकृतिक पत्थर और लकड़ी पर पर्यावरणीय प्रभावों के कारण होने वाले क्षरण का उल्लेख किया गया। साथ ही संरक्षण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित सामग्री का सूक्ष्म विश्लेषण और आवश्यक तकनीकी जांच कराने की सलाह दी गई।

नवंबर में फिर निरीक्षण करेगी विशेषज्ञ टीम

मंदिर न्यास के मुताबिक, IIT मद्रास की विशेषज्ञ टीम नवंबर 2026 में मुख्य मंदिर परिसर का दोबारा निरीक्षण करेगी। इस दौरान आवश्यक तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। इनके आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें मंदिर की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसकी धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक महत्ता को संरक्षित रखने के लिए आवश्यक उपाय सुझाए जाएंगे।

मूल संरचना और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर जोर

मंदिर न्यास ने स्पष्ट किया कि शिखर के संरक्षण और मरम्मत से जुड़े सभी कार्य विशेषज्ञों के तकनीकी परामर्श तथा वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य मंदिर की मूल संरचना को सुरक्षित रखते हुए आवश्यक मरम्मत कार्य संपन्न कराना है।

न्यास ने कहा कि वह श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की प्राचीन संरचना, धार्मिक गरिमा और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। शिखर की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और संरक्षण की उचित कार्ययोजना तैयार करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।


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