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शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन काशी विश्वनाथ धाम में मां विशालाक्षी के लिए अर्पित की गई श्रृंगार सामग्री, नवदुर्गा सप्तशती का पाठ संपन्न



 14/Oct/26

वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ धाम में विधि-विधान से संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान, मां विशालाक्षी के प्रति श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा-अर्चना

 शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर काशी में देवी आराधना और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी है। नवरात्रि के तृतीय दिवस पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में विधि-विधानपूर्वक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। इस अवसर पर मां विशालाक्षी के निमित्त श्रृंगार सामग्री भगवान श्री विश्वेश्वर को अर्पित कराई गई। इसके बाद यह सामग्री मां विशालाक्षी को समर्पित की गई। साथ ही, श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ नवदुर्गा सप्तशती का पाठ भी संपन्न हुआ।

श्री काशी विश्वनाथ धाम में नवरात्रि के दौरान धार्मिक परंपराओं और पूजा-पद्धतियों का विशेष महत्व है। इसी क्रम में तृतीय दिवस पर आयोजित अनुष्ठानों में मां विशालाक्षी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए श्रृंगार सामग्री अर्पित की गई। धार्मिक विधि के अनुसार भगवान श्री विश्वेश्वर को अर्पित कराई गई श्रृंगार सामग्री मां विशालाक्षी को समर्पित की गई। इस अनुष्ठान के माध्यम से देवी आराधना की परंपरा का निर्वहन किया गया।

नवदुर्गा सप्तशती के पाठ से भक्तिमय हुआ वातावरण

नवरात्रि के तीसरे दिन श्री काशी विश्वनाथ धाम में नवदुर्गा सप्तशती का पाठ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। देवी उपासना में नवदुर्गा सप्तशती के पाठ का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इसी आस्था और परंपरा के अनुरूप धाम में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया।

शारदीय नवरात्रि के अवसर पर काशी की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं का विशेष महत्व रहता है। श्री काशी विश्वनाथ धाम में संपन्न हुए इन अनुष्ठानों के माध्यम से देवी आराधना और सनातन धार्मिक परंपराओं के प्रति श्रद्धा प्रकट की गई।

इस पावन अवसर पर मां विशालाक्षी के निमित्त श्रृंगार सामग्री का समर्पण और नवदुर्गा सप्तशती का पाठ नवरात्रि की धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

हर-हर महादेव!

॥ श्री काशीविश्वनाथो विजयतेतराम् ॥


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