सनबीम स्कूल सारनाथ में राजस्थान की समृद्ध लोक संगीत परंपरा को समर्पित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘रोशन खान मांगणियार का राग बाड़मेरी’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को राजस्थानी लोक संगीत, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कलाओं की विशेषताओं से परिचित कराया गया। लोक संगीत की प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों को भारतीय संगीत परंपराओं की विविधता और कलाकारों की साधना को समझने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत संबोधन से हुआ। इसके बाद आमंत्रित कलाकारों का परिचय कराया गया और दीप प्रज्वलन के साथ सांस्कृतिक आयोजन को आगे बढ़ाया गया। कार्यक्रम में प्रस्तुत ‘कला दर्शन’ के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय लोक संगीत की परंपरा, उसकी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक कलाओं के महत्व से अवगत कराया गया।
सनबीम स्कूल सारनाथ की प्रधानाचार्या आरती कुमारी ने अपने स्वागत संबोधन में भारतीय लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने सांस्कृतिक आयोजनों को विद्यार्थियों में भारतीय कला एवं संस्कृति के प्रति रुचि और सम्मान विकसित करने का माध्यम बताया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ भारतीय लोक परंपराओं का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना रहा। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाकारों के योगदान और पारंपरिक संगीत की महत्ता को समझने का अवसर मिलता है। साथ ही, उनकी कलात्मक अभिरुचि और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को भी प्रोत्साहन मिलता है।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय की उप प्रधानाचार्या डॉ. प्रज्ञा शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कलाकारों, अतिथियों और आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
‘राग बाड़मेरी’ का आयोजन विद्यार्थियों को राजस्थान की लोक संगीत विरासत से जोड़ने तथा उनमें भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान और सांस्कृतिक चेतना विकसित करने की दिशा में एक सार्थक पहल रहा।