MENU

Ramnagar Ki Ramleela: बालि वध कर श्रीराम ने निभाया मित्रता का वचन, सुग्रीव को दिलाया राजपाट



 12/Oct/26

रामनगर। विश्वप्रसिद्ध Ramnagar Ki Ramleela के अठारहवें दिन श्रीराम ने बालि का वध कर सुग्रीव को दिया अपना वचन निभाया और उसे किष्किंधा का राजा बनाया। इसके बाद सीता की खोज में निकले वानरों को संपाति ने माता सीता के लंका में अशोक वाटिका में होने की जानकारी दी। समुद्र लांघने की चुनौती के बीच जामवंत ने हनुमान को उनकी शक्ति का स्मरण कराया। हनुमान की गर्जना और आरती के साथ लीला को विश्राम दिया गया।

लीला के प्रसंग में श्रीराम सुग्रीव को बालि से युद्ध करने के लिए भेजते हैं। बालि की पत्नी तारा उसे युद्ध में जाने से रोकने का प्रयास करती है, लेकिन बालि उसकी बात नहीं मानता। वह यह कहते हुए युद्ध के लिए निकल पड़ता है कि भगवान सभी को समान दृष्टि से देखते हैं।

युद्ध में बालि सुग्रीव पर भारी पड़ता है। दोनों भाइयों का रूप एक जैसा होने के कारण श्रीराम उन्हें पहचानने में भ्रमित हो जाते हैं। इसके बाद सुग्रीव को माला पहनाकर दोबारा युद्ध के लिए भेजा जाता है। जब बालि और सुग्रीव के बीच फिर से युद्ध होता है, तब श्रीराम पेड़ की आड़ से बाण चलाकर बालि का वध कर देते हैं।

मृत्यु से पहले बालि अपने पुत्र अंगद को श्रीराम को सौंप देता है। इसके बाद सुग्रीव का राजतिलक कर उसे किष्किंधा का राजा बनाया जाता है।

राजमद में सुग्रीव भूले वचन, श्रीराम ने दिलाया याद

सुग्रीव के राजा बनने के बाद वर्षा ऋतु में श्रीराम और लक्ष्मण प्रवर्षण पर्वत पर निवास करते हैं। वर्षा और बरसते बादलों का वर्णन करते हुए श्रीराम सीता की खोज की प्रतीक्षा करते हैं। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब सीता की कोई सूचना नहीं मिलती, तो श्रीराम सुग्रीव के राजमद में अपना वचन भूल जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हैं।

श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि जिस बाण से बालि का वध किया था, उसी से सुग्रीव को भी दंड दिया जा सकता है। लक्ष्मण के क्रोध की सूचना मिलने पर सुग्रीव सक्रिय होते हैं और सभी वानरों को माता सीता की खोज में भेजते हैं। वह निर्धारित समय में सीता की सूचना नहीं मिलने पर कठोर दंड देने की चेतावनी भी देते हैं।

हनुमान को सौंपी श्रीराम ने अपनी अंगूठी

सीता की खोज के लिए दक्षिण दिशा में जाने वाली वानर टोली को रवाना करते समय श्रीराम हनुमान को अपनी अंगूठी सौंपते हैं। वह हनुमान से माता सीता तक अपना संदेश पहुंचाने और शीघ्र लौटने को कहते हैं।

खोज करते हुए वानर समुद्र के किनारे पहुंचते हैं, जहां उनकी भेंट जटायु के बड़े भाई संपाति से होती है। संपाति उन्हें बताता है कि माता सीता लंका की अशोक वाटिका में हैं। इसके बाद वानर समुद्र पार करने के उपाय पर विचार करने लगते हैं। सभी अपनी-अपनी क्षमता बताते हैं, लेकिन विशाल समुद्र को लांघने की चुनौती सामने रहती है।

तभी जामवंत हनुमान को उनकी अद्भुत शक्ति और सामर्थ्य का स्मरण कराते हैं। अपनी शक्ति का एहसास होते ही हनुमान गर्जना करते हैं। इसी प्रसंग के साथ आरती हुई और अठारहवें दिन की Ramnagar Ki Ramleela को विश्राम दिया गया।


इस खबर को शेयर करें

Leave a Comment

8312


सबरंग