वाराणसी। न्यायालयों में लंबित मुकदमों का आपसी सुलह और समझौते के आधार पर निस्तारण करने के उद्देश्य से वाराणसी में ‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0’ संचालित किया जा रहा है। यह अभियान 1 अगस्त 2026 से शुरू हुआ है। इसके तहत पक्षकार मध्यस्थता के माध्यम से विभिन्न प्रकार के विवादों का शांतिपूर्ण समाधान प्राप्त कर सकते हैं। यह जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, वाराणसी के पूर्णकालिक सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) राजीव मुकुल पाण्डेय ने दी।
राजीव मुकुल पाण्डेय ने बताया कि यह अभियान उच्चतम न्यायालय, मीडिएशन एवं कंसीलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में संचालित किया जा रहा है।
इस अभियान के माध्यम से पक्षकार वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा से संबंधित मामले, मोटर दुर्घटना के मामले, चेक बाउंस, वाणिज्यिक विवाद, उपभोक्ता फोरम के मामले, भूमि अधिग्रहण संबंधी विवाद, सेवा संबंधी मामले, शमनीय आपराधिक मामले, ऋण वसूली, बेदखली और अन्य उपयुक्त दीवानी मामलों का मध्यस्थता के जरिए समाधान करा सकते हैं।
अभियान के अंतर्गत पक्षकारों के बीच सुलह-समझौते की प्रक्रिया जनपद न्यायालय, वाराणसी परिसर स्थित वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र (एडीआर सेंटर) के मध्यस्थता हॉल में संपन्न कराई जाएगी। इसका उद्देश्य विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने के अवसर उपलब्ध कराना है।
मध्यस्थता के माध्यम से पक्षकार न्यायालय में लंबित उपयुक्त मामलों का समाधान आपसी सहमति से प्राप्त कर सकते हैं। इससे विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से निपटाने में मदद मिल सकती है।
मध्यस्थता अभियान को व्यापक स्तर पर सफल बनाने के लिए जिला जज के निर्देशन में समस्त मध्यस्थों तथा सेंट्रल बार और बनारस बार के अध्यक्षों एवं महामंत्रियों के साथ विस्तृत बैठक आयोजित की गई।
बैठक में अभियान के प्रचार-प्रसार और अधिवक्ताओं को इससे जोड़ने पर चर्चा की गई। साथ ही विद्वान अधिवक्ताओं से अभियान को सफल बनाने और अधिक से अधिक उपयुक्त मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारित कराने में सहयोग देने की अपील की गई।
‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0’ के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए इच्छुक पक्षकार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, वाराणसी के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य आपसी सुलह और समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान करने के अवसर उपलब्ध कराना और न्यायालयों में लंबित उपयुक्त वादों के निस्तारण की प्रक्रिया को गति देना है।