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नीमच से रामनगर पहुंचे बेर, माता शबरी ने प्रभु श्रीराम को खिलाए



 11/Oct/26

रामनगर की रामलीला में पांच पीढ़ियों से राजबन्धु मिष्ठान भंडार निभा रहा प्रभु की सेवा की परंपरा, मध्यप्रदेश के नीमच से मंगाए जाते हैं बेर

रामनगर (वाराणसी)। Ramnagar Ki Ramleela में गुरुवार को माता शबरी द्वारा प्रभु श्रीराम को बेर खिलाने का प्रसंग श्रद्धा और परंपरा के साथ मंचित किया गया। इस लीला की खास बात यह रही कि माता शबरी द्वारा प्रभु को अर्पित किए जाने वाले बेर मध्यप्रदेश के नीमच से मंगाए गए थे। रामनगर की रामलीला में प्रसंगों को वास्तविक वस्तुओं के माध्यम से प्रस्तुत करने की परंपरा का यह एक अनूठा उदाहरण है।

करीब पांच दशक से बनारस का प्रतिष्ठित राजबन्धु मिष्ठान भंडार रामलीला में प्रभु श्रीराम को अर्पित किए जाने वाले बेर उपलब्ध कराता आ रहा है। बताया जाता है कि इस परंपरा को परिवार की पिछली पांच पीढ़ियों से निभाया जा रहा है।

राजबन्धु मिष्ठान भंडार की ओर से बताया गया कि इस बार भी पिछले वर्षों की तरह अपने संपर्कों के माध्यम से नीमच से बेर मंगाए गए। इसके बाद गुरुवार को इन्हें रामलीला स्थल तक पहुंचाया गया। कभी परिवार के सदस्य स्वयं नीमच जाकर बेर लाते हैं, तो कभी वहां मौजूद संपर्कों के माध्यम से इन्हें मंगवाया जाता है।

खास बात यह है कि इस समय बनारस और आसपास के क्षेत्रों में बेर का सामान्य मौसम नहीं है। ऐसे में मध्यप्रदेश के नीमच से मंगाए गए बेर माता शबरी और प्रभु श्रीराम के प्रसंग को और विशेष बना देते हैं।

रामनगर की रामलीला की विशिष्टता यही है कि इसमें रामचरितमानस के प्रसंगों को केवल अभिनय तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि जहां संभव होता है, वहां संबंधित वस्तुओं का वास्तविक रूप में इस्तेमाल किया जाता है। माता शबरी के बेर के लिए नीमच तक की व्यवस्था करना इसी परंपरा, समर्पण और सेवा भाव को दर्शाता है।

रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में निभाई जाने वाली ऐसी परंपराएं इसकी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पीढ़ियों से चले आ रहे समर्पण को जीवंत बनाए रखती हैं।


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