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एपेक्स में लाइव स्पाइन सर्जरी कॉन्फ्रेंस का पहला दिन, सर्जिकल प्लानिंग से लाइव ऑपरेशन तक विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव



 05/Oct/26

रीढ़ की जटिल बीमारियों के उपचार, सर्जिकल निर्णय और आधुनिक तकनीकों पर हुआ मंथन; केस प्रेजेंटेशन और लाइव सर्जरी से बढ़ा व्यावहारिक ज्ञान

वाराणसी। एपेक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एवं पीजीआई, वाराणसी में एपेक्स एकेडमिक एक्टिविटी के तहत वाराणसी ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (वीओए) के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय लाइव स्पाइन सर्जरी कॉन्फ्रेंस के पहले दिन रीढ़ की बीमारियों के उपचार, सर्जिकल निर्णय और आधुनिक ऑपरेशन तकनीकों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित हुए। चेयरमैन प्रो. डॉ. एसके सिंह की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन का विषय ‘प्लानिंग टू एक्जीक्यूशन’ रहा। केस प्रस्तुतियों, पैनल चर्चाओं और लाइव सर्जरी के माध्यम से विशेषज्ञों ने सर्जिकल प्लानिंग से लेकर ऑपरेशन तक के अनुभव साझा किए।

वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. स्वरूप पटेल और डॉ. अमन वर्मा की टीम ने लाइव स्पाइन सर्जरी सत्र में संबंधित केस की स्थिति और ऑपरेशन की योजना पर चर्चा की। सर्जरी से पहले मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की रणनीति और सर्जिकल निर्णयों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। लाइव सत्रों में प्रो. डॉ. पंकज कंडवाल, डॉ. विशाल कुंदनानी और डॉ. भास्कर सरकार ने मॉडरेटर के रूप में सर्जिकल निर्णयों और तकनीकी पहलुओं पर संवाद का मार्गदर्शन किया।

रीढ़ में मेटास्टेसिस और फेल्ड बैक सर्जरी पर चर्चा

वैज्ञानिक सत्रों में डॉ. विशाल कुंदनानी ने रीढ़ में संदिग्ध मेटास्टेसिस के मूल्यांकन और पूर्व सर्जरी के बाद बनी रहने वाली समस्याओं यानी फेल्ड बैक सर्जरी सिंड्रोम में दोबारा हस्तक्षेप की आवश्यकता पर विचार रखे।

प्रो. डॉ. अभिषेक कश्यप ने एंडोस्कोपिक तकनीक के जरिए कैल्सीफाइड डिस्क के प्रबंधन की जानकारी दी। डॉ. अरुण कुमार विश्वनाधा ने ऑपरेशन के लिए सही डिस्क स्तर के चयन तथा वयस्कों में रीढ़ की विकृति के उपचार में संरचनात्मक सुधार के साथ वास्तविक कार्यक्षमता के महत्व पर चर्चा की।

डॉ. एस. कुमार सिंह ने डिस्क प्रोलैप्स में अनावश्यक उपचार से बचने पर अपने विचार रखे। वहीं डॉ. अरविंद जी. कुलकर्णी ने लो-ग्रेड स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस में फ्यूजन की आवश्यकता पर चर्चा की।

लम्बर कैनाल स्टेनोसिस और एंडोस्कोपिक सर्जरी पर मंथन

डॉ. के. श्रीकृष्ण चैतन्य ने लम्बर कैनाल स्टेनोसिस में डीकम्प्रेशन अथवा फ्यूजन फिक्सेशन के चयन के साथ एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की उपयोगिता और सीमाओं पर जानकारी दी। डॉ. वरुण खन्ना ने ओपन स्पाइन सर्जरी की प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए।

इस दौरान डॉ. संदीप केशरवानी, डॉ. शशांक कृष्णन, डॉ. विनीत यादव, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. अक्षत चंद्रा और डॉ. अपूर्व अग्रवाल की केस प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न उपचार विकल्पों पर व्यावहारिक चर्चा हुई। सत्र संचालन में डॉ. अभिनव अग्रवाल, डॉ. एस. कुमार सिंह, डॉ. अक्षत चंद्रा, डॉ. संदीप केशरवानी और डॉ. अपूर्व अग्रवाल की प्रमुख भूमिका रही।

मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार पर रहा जोर

सम्मेलन के पहले दिन मरीज की स्थिति के अनुरूप उपचार का चयन, सुविचारित सर्जिकल प्लानिंग और आधुनिक तकनीकों के उचित उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। लाइव स्पाइन सर्जरी और विशेषज्ञों के संवाद के माध्यम से प्रतिभागियों को रीढ़ की जटिल समस्याओं के प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं और सर्जिकल निर्णय प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।


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