वाराणसी। शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में मुकदमे का सामना कर रहे डीरेका के रेलकर्मी जितेंद्र कुमार राही को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। अपर जिला जज (सप्तम) विकास श्रीवास्तव की अदालत ने अभियोजन की ओर से लगाए गए आरोपों के पर्याप्त रूप से सिद्ध नहीं होने पर आरोपित को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
मामले में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, अधिवक्ता बृजपाल सिंह यादव 'गुड्डू' और नरेश यादव ने पक्ष रखा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता ने 23 सितंबर 2020 को पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि ठठरा, मिर्जामुराद निवासी जितेंद्र कुमार राही उसके भाई का दोस्त था और गांव में क्रिकेट खेलने आता था। वह रेलवे में ग्रुप डी के पद पर कार्यरत था।
प्रार्थना पत्र में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपित ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ आपत्तिजनक व्यवहार किया और बाद में शादी करने से इनकार कर दिया। मामले में पुलिस ने 13 अक्टूबर 2020 को मुकदमा दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता समेत पांच गवाहों को अदालत में परीक्षित कराया गया। अदालत ने गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया।
साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसके बाद अदालत ने जितेंद्र कुमार राही को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
अदालत के इस फैसले से लंबे समय से चल रहे मामले का निस्तारण हो गया।