वाराणसी। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी ने 28 सितंबर को अपना 36वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया। समारोह में देशभर से वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान, छात्र-छात्राएं और संस्थान के कार्मिक शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके बाद संस्थान की उपलब्धियों और प्रगति पर आधारित वृत्तचित्र प्रस्तुत किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. पी.एस. पाण्डेय, कुलपति, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर ने कहा कि सब्जियां पोषण और स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने आईआईवीआर द्वारा विकसित उन्नत किस्मों और तकनीकों की सराहना करते हुए कहा कि इनसे किसानों की आय और पोषण सुरक्षा को मजबूती मिल रही है। उन्होंने जलवायु स्मार्ट फसलों, पोषक तत्वों से भरपूर किस्मों और शहरी खेती के मॉडल पर शोध को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने वैज्ञानिकों से बदलते परिवेश के अनुरूप नए शोध की दिशा में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया। उन्होंने आईआईवीआर की कलमी साग प्रजाति ‘काशी मनु’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जैविक और प्राकृतिक खेती के लिए उपयोगी है तथा वर्षभर उत्पादन देने के साथ गर्मी, सर्दी और जलजमाव जैसी परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता रखती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. बिजेंद्र सिंह, कुलपति, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या ने कहा कि आईआईवीआर ने पिछले 35 वर्षों में देश की सब्जी क्रांति को नई दिशा दी है। उन्होंने किसानों की सामाजिक और आर्थिक उन्नति के लिए संस्थान के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने वर्षभर सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, जैविक खेती, पोषक सब्जियों की आपूर्ति और उद्यमिता विकास के क्षेत्र में शोध को बढ़ाने की आवश्यकता बताई। साथ ही बहुरोग प्रतिरोधी किस्मों के विकास और सुरक्षित सब्जी उत्पादन पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. मेजर सिंह, पूर्व सदस्य, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली ने कहा कि आईआईवीआर ने विज्ञान आधारित नवाचारों के माध्यम से किसानों तक तकनीक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने एफपीओ मॉडल और मूल्य संवर्धन के जरिए ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने की बात कही। उन्होंने भविष्य में फल एवं सब्जियों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए शोध को और विस्तार देने पर जोर दिया।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि संस्थान के निदेशक एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. वी.के. मिश्रा ने खाद्य उत्पादन प्रणाली, जलवायु परिवर्तन और बहुरोग प्रतिरोधी किस्मों के विकास को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सुरक्षित सब्जी उत्पादन तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पोषण और आय सुरक्षा से जुड़े शोध को बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
विशिष्ट अतिथि डॉ. मयंक राय, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, समस्तीपुर ने जलवायु परिवर्तन और मृदा स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शोध कार्य करने पर जोर दिया।
आईआईवीआर के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने स्वागत भाषण में संस्थान की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान अब तक 150 से अधिक उन्नत किस्में और संकर विकसित कर चुका है। इसके अलावा तकनीकी बुलेटिन, प्रशिक्षण कार्यक्रम और बीज उत्पादन योजनाओं के माध्यम से देशभर के किसानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान ‘स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत’ के लक्ष्य के साथ कार्य कर रहा है और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों और कर्मचारियों डॉ. धनंजय प्रताप सिंह, एस.के. सिंह, बोबी कुमार और अरुण कुमार को सम्मानित किया गया। शोध एवं शिक्षा के विस्तार के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी किया गया। इसके अलावा फार्म सागर बायोटेक, गुजरात, नेचुरल एंड एसेंशियल ऑयल्स, कर्नाटक तथा टी स्टांस एंड कंपनी लिमिटेड, तमिलनाडु के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को लेकर समझौते हुए।
कार्यक्रम का संचालन प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ए.एन. सिंह ने किया।