नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके जीवन और कार्यों को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन लोककल्याण के लिए समर्पित रहा। 27 सितंबर से अशोक सिंघल का जन्मशताब्दी वर्ष मनाए जाने के अवसर पर प्रधानमंत्री ने उनके साथ अपने लंबे जुड़ाव और उनसे मिले मार्गदर्शन एवं स्नेह से जुड़े संस्मरण भी साझा किए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल ने आध्यात्मिक साधना, सांस्कृतिक जागरण तथा समाज और संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाने में दशकों तक समर्पित भाव से योगदान दिया। उन्होंने अशोक सिंघल के जीवन को उस भारतीय परंपरा से जोड़ा, जिसमें व्यक्ति अपने जीवन को दूसरों की सेवा और लोककल्याण के लिए समर्पित करता है।
मोदी ने 1981 की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय उन्हें अशोक सिंघल का हाथ से लिखा पत्र मिला था, जिसमें एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम और उन्हें दी गई जिम्मेदारियों का उल्लेख था। प्रधानमंत्री ने इसे अपने लिए विशेष और यादगार क्षण बताया।
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल देश के दूर-दराज के क्षेत्रों की यात्राएं करते थे और समाज के वंचित एवं अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के लिए लगातार काम करने पर विचार करते थे। प्राकृतिक आपदाओं के समय भी वे प्रभावित लोगों की सहायता के लिए सक्रिय रहते थे। वर्ष 2001 के कच्छ भूकंप के बाद उनके साथ के अनुभव को प्रधानमंत्री ने अविस्मरणीय बताया।
प्रधानमंत्री ने अशोक सिंघल की प्रारंभिक जीवन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिष्ठित परिवार से होने के बावजूद उनका झुकाव समाज सेवा और राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में था। प्रयागराज में संगम के तट और साधु-संतों के संपर्क ने भी उनके सांस्कृतिक दृष्टिकोण को समृद्ध किया। बाद में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और मिली जिम्मेदारियों को अनुशासन एवं कर्तव्यभाव से निभाया।
मोदी ने कहा कि अशोक सिंघल ने अपनी संगठन क्षमता, ओजस्वी वक्तृत्व और कार्यकर्ताओं के प्रति आत्मीयता से अनेक संस्थाओं और आंदोलनों को मजबूत किया। संत समाज के साथ उनके संबंधों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने 1993 में अमेरिका में आयोजित स्वामी विवेकानंद के शिकागो संबोधन की शताब्दी से जुड़े सम्मेलन और वर्ष 2000 में त्रिनिदाद एवं टोबैगो के पोर्ट ऑफ स्पेन में आयोजित विश्व हिंदू सम्मेलन की घटनाओं को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों में अशोक सिंघल की संगठन क्षमता और कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने की भूमिका देखने को मिली।
राम जन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंघल की भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने 1991 की बोट क्लब रैली और आंदोलन के दौरान उनकी सक्रियता को याद किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के पीछे अशोक सिंघल जैसी विभूतियों का समर्पण रहा।
प्रधानमंत्री ने अशोक सिंघल के सामाजिक समरसता और समानता संबंधी विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिंघल समाज में भेदभाव समाप्त करने और प्रत्येक व्यक्ति को समान गरिमा एवं सम्मान दिए जाने के पक्षधर थे। मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर की पहली ईंट रखने के लिए वंचित वर्ग से आने वाले कामेश्वर चौपाल का चयन किए जाने और काशी में डोम राजा को सम्मानित करने से जुड़े प्रसंग भी साझा किए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, विशेषकर वैदिक शिक्षा और संगीत, अशोक सिंघल के प्रिय विषयों में शामिल थे। बीएचयू से उनकी शिक्षा, एकल विद्यालय की पहल से उनका जुड़ाव और युवाओं को पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करने का भी प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया।
मोदी ने अशोक सिंघल के संगीत प्रेम को याद करते हुए कहा कि वे सुंदर गायन करते थे और बैठकों में ‘एकल गीत’ गाया करते थे। वर्ष 2015 में उनके 90वें जन्मदिवस के अवसर पर उनके गायन से जुड़ा वीडियो भी व्यापक रूप से चर्चित हुआ था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल ने अपने जीवन में राष्ट्र के उत्कर्ष का सपना देखा। उन्होंने जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर युवाओं से उनके जीवन और कार्यों से परिचित होने तथा उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।