MENU

वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव की पैरवी पर दलित युवती से दुष्कर्म और गर्भपात मामले में आरोपित को जमानत



 25/Sep/26

विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) की अदालत ने विनोद शंकर उर्फ विनोद यादव को दी राहत, एक-एक लाख रुपये की दो जमानतें एवं बंधपत्र पर रिहाई का आदेश

वाराणसी। दलित युवती से कथित दुष्कर्म, धमकी देने, अश्लील फोटो-वीडियो बनाने तथा गर्भपात कराने के मामले में आरोपित विनोद शंकर उर्फ विनोद यादव को अदालत से जमानत मिल गई है। विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) सर्वजीत सिंह की अदालत ने नरिया, साकेत नगर (लंका) निवासी आरोपित को एक-एक लाख रुपये की दो जमानतें एवं बंधपत्र प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने आरोपित का पक्ष रखा।

ब्याज पर लिए गए 50 हजार रुपये को लेकर शुरू हुआ विवाद

अभियोजन पक्ष के अनुसार भेलूपुर थाना क्षेत्र की निवासी वादिनी ने भेलूपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वादिनी ने करीब तीन वर्ष पूर्व नरिया, साकेत नगर (लंका) निवासी विनोद शंकर उर्फ विनोद यादव से 50 हजार रुपये ब्याज पर लिए थे।

आरोप है कि कभी-कभी ब्याज की रकम देने में देरी होने का अनुचित लाभ उठाते हुए विनोद यादव ने वादिनी पर दबाव बनाना शुरू किया।

परमहंस होटल में जबरन शारीरिक संबंध बनाने का आरोप

प्राथमिकी के अनुसार वादिनी ने आरोप लगाया कि उसकी इच्छा और सहमति के विरुद्ध परमहंस होटल, सिगरा में कई बार उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए। विरोध करने पर कथित रूप से उसे धमकाया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि विनोद यादव ने वादिनी के अश्लील फोटो और वीडियो बना लिए थे।

रकम वापस करने के बाद फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी का आरोप

अभियोजन के अनुसार वादिनी ने बाद में विनोद यादव को ब्याज सहित मूल धनराशि वापस कर दी। आरोप है कि इसके बाद भी फोटो और वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने तथा उन्हें परिवार और परिचितों को भेजकर सामाजिक प्रतिष्ठा खराब करने की धमकी दी जाने लगी।

गर्भवती होने के बाद दवा खिलाकर गर्भ गिराने का आरोप

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि इसी दौरान वादिनी गर्भवती हो गई। आरोप है कि इसके बाद विनोद यादव ने उसे ऐसी दवा खिलाई, जिसके कारण उसका गर्भ गिर गया।

मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार किया था और उसे जेल भेज दिया गया था।

अदालत से मिली जमानत

मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने अदालत के समक्ष आरोपित का पक्ष रखा। सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) सर्वजीत सिंह की अदालत ने विनोद शंकर उर्फ विनोद यादव को एक-एक लाख रुपये की दो जमानतें एवं बंधपत्र दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया।

यहां उल्लेखनीय है कि प्राथमिकी और अभियोजन पक्ष में लगाए गए आरोप मामले की न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय द्वारा मामले के अंतिम निर्णय में ही होगी।


इस खबर को शेयर करें

Leave a Comment

8128


सबरंग