वाराणसी। चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकुल में रविवार को सोनार समाज का महा समागम आयोजित किया गया। स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में आयोजकों के अनुसार उत्तर प्रदेश के करीब 35 जिलों के प्रतिनिधियों के साथ मध्य प्रदेश और बिहार से भी प्रतिनिधि शामिल हुए। समागम में समाज की एकता, सामाजिक अधिकार, सुरक्षा, राजनीतिक भागीदारी और पारंपरिक स्वर्ण कला से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में सोनार समाज की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने समाज की ओर से आगामी चुनावों में जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग रखने, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कोर कमेटी गठित करने और सरकार को विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन देने का प्रस्ताव रखा।
आयोजक स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान के राष्ट्रीय चेयरमैन रवि सर्राफ ने कहा कि समाज को संगठित करने के उद्देश्य से विभिन्न जिलों में जनसंपर्क किया गया। जिलाध्यक्ष किशोर सेठ ने बताया कि काशी को 30 सेक्टरों में बांटकर पिछले चार महीनों से जनसंपर्क अभियान चलाया गया।
समागम में उत्तर प्रदेश में स्वर्ण कला बोर्ड के गठन की मांग भी उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि पारंपरिक स्वर्ण कला से जुड़े कारीगरों के हितों के संरक्षण और विकास के लिए एक संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है। इसके माध्यम से कारीगरों के प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, पेंशन और उनके बच्चों की शिक्षा से संबंधित सहायता उपलब्ध कराने की मांग रखी गई।
कार्यक्रम में सर्राफा कारोबारियों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने लूट, चोरी, डकैती और अन्य आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने तथा व्यापारियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की। इसके अलावा बीएनएस की धारा 317 से संबंधित मामलों में सर्राफा कारोबारियों के सामने आने वाली समस्याओं पर भी चर्चा हुई और कानूनी स्तर पर पहल करने की बात कही गई।
प्रतिनिधियों ने पारंपरिक सर्राफा कारोबार और गिरवी व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए पुरानी साहूकारी लाइसेंस व्यवस्था बहाल करने की मांग भी रखी।
समागम के अंतिम सत्र में समाज के भीतर एकता और सामूहिक हितों को प्राथमिकता देने की बात कही गई। पूर्वांचल अध्यक्ष ईश्वर दयाल सिंह सेठ और महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष सरिता सर्राफ ने युवाओं, महिलाओं, कारीगरों और व्यापारियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने तथा शिक्षा, रोजगार और सामाजिक उत्थान के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत महाराजा अजमीढ़, महाराज अंबरीष और संत नरहरी दास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पित कर हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृष्ण नारायण सोनी ने की। स्वागत भाषण एवं संचालन रवि सर्राफ ने किया, जबकि प्रस्तावना किशोर सेठ और धन्यवाद ज्ञापन अरुण सोनी ने किया।
समागम में सरिता सर्राफ, राघवेंद्र सिंह चौहान, ईश्वर दयाल सिंह सेठ, गिरीश वर्मा, आकाश वर्मा, विजय, वशिष्ठ नारायण सोनी, शारदा शंकर सिंह, समरजीत सिंह, राकेश वर्मा, संजय वर्मा सहित विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश में स्वर्ण कला बोर्ड का गठन।
सर्राफा कारोबारियों की सुरक्षा और आपराधिक घटनाओं पर रोक।
पुरानी साहूकारी लाइसेंस व्यवस्था की बहाली।
बीएनएस की धारा 317 से जुड़ी समस्याओं का समाधान।
जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग।