बोले- कर्मयोग और न्याय अपनाकर समाज को मजबूत बनाएं, अन्याय के खिलाफ खड़े हों
चंदौली। ग्राम डेढ़ंगावा, ब्लॉक बरहनी में निषाद पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं वाराणसी मंडल सह-कोऑर्डिनेटर चंदन सिंह राजपूत ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर देशवासियों और युवाओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, संघर्ष, कर्मयोग और गीता के संदेश को वर्तमान समय में युवाओं के लिए बेहद प्रासंगिक और प्रेरणादायक बताया।
चंदन सिंह राजपूत ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन में अन्याय और अधर्म के खिलाफ संघर्ष करते हुए अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी सत्य और न्याय का मार्ग नहीं छोड़ा। उनका जीवन युवाओं को सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, धैर्य और साहस के साथ अपने कर्तव्य के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कर्मयोग आज के युवाओं के लिए श्रीकृष्ण का सबसे बड़ा संदेश है। युवाओं को परिणाम की चिंता किए बिना अपने कर्म और कर्तव्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए समाज और देश के हित में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल अपने स्वार्थ तक सीमित रहने के बजाय गरीब, कमजोर, बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आना ही सच्ची मानव सेवा है।
चंदन सिंह राजपूत ने युवाओं से आह्वान किया कि समाज में कहीं भी अन्याय, अत्याचार या किसी व्यक्ति की मजबूरी दिखाई दे तो अपनी क्षमता के अनुसार उसकी मदद के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि युवाओं में ऊर्जा, नेतृत्व और बदलाव लाने की क्षमता है। इस शक्ति का सकारात्मक उपयोग समाज और राष्ट्र के निर्माण में किया जाए तो देश को नई दिशा दी जा सकती है।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार श्रीकृष्ण ने महाभारत के दौरान अर्जुन के सारथी बनकर उन्हें कर्तव्य और धर्म का मार्ग दिखाया, उसी प्रकार आज के युवाओं को भी समाज में सकारात्मक भूमिका निभाते हुए लोगों को सही दिशा दिखाने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ खड़ा होना ही सच्ची कृष्णभक्ति है। श्रीकृष्ण ने सदैव धर्म, सत्य और न्याय का पक्ष लिया। इसलिए जन्माष्टमी केवल उत्सव मनाने का पर्व नहीं, बल्कि उनके विचारों और आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेने का अवसर भी है।
चंदन सिंह राजपूत ने युवाओं से आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर समाज के विकास में योगदान देने और देशहित को सर्वोपरि रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी द्वापर युग में थीं। यदि देश का युवा कर्मयोग, सत्य, न्याय, सेवा और इंसानियत के मार्ग पर चले तो समाज और राष्ट्र को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
अंत में उन्होंने सभी देशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।