वाराणसी। आजाद सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने वाराणसी के चौक थाना क्षेत्र में दर्ज एक आपराधिक मुकदमे की जांच में हो रही देरी को लेकर विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। उन्होंने अदालत से मामले की अब तक की जांच की प्रगति रिपोर्ट तलब करने का अनुरोध किया है।
अमिताभ ठाकुर ने अपने अधिवक्ता अनुज यादव के माध्यम से दायर अर्जी में कहा है कि एफआईआर दर्ज होने के छह माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया है। उनका कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के मात्र 10 दिनों के भीतर पुलिस ने उनकी न्यायिक हिरासत की मांग की थी, लेकिन इसके बाद भी जांच को अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंचाया गया।
अर्जी में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि जांच एजेंसी के पास न्यायिक हिरासत की मांग करने लायक पर्याप्त आधार थे, तो फिर छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच लंबित रखने का क्या औचित्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक न तो जांच पूरी की गई है और न ही सक्षम न्यायालय में अंतिम पुलिस रिपोर्ट या आरोप पत्र दाखिल किया गया है।
मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने चौक पुलिस से इस संबंध में आख्या तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को निर्धारित की गई है।
क्या है मामला?
गौरतलब है कि बड़ी पियरी निवासी, हिन्दू युवा वाहिनी के नेता एवं वीडीए के मानद सदस्य अम्बरीष सिंह 'भोला' की शिकायत पर 9 दिसंबर को चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि अमिताभ ठाकुर ने 30 नवंबर को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा कर उनके विरुद्ध आपराधिक मामलों तथा बहुचर्चित कफ सिरप प्रकरण में बिना साक्ष्य के भ्रामक और मानहानिकारक आरोप लगाए, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
इस मामले में पुलिस ने अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर तथा एक अन्य के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। एफआईआर के लगभग 10 दिन बाद अमिताभ ठाकुर को देवरिया से गिरफ्तार कर वाराणसी लाया गया था, जहां न्यायालय से उनका न्यायिक रिमांड बनने के बाद उन्हें वापस देवरिया जेल भेज दिया गया था। बाद में उन्हें इस मामले में जमानत मिल गई थी।
अब इसी मुकदमे की जांच में कथित देरी को लेकर अमिताभ ठाकुर ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अदालत के निर्देश के बाद अब चौक पुलिस को जांच की वर्तमान स्थिति से न्यायालय को अवगत कराना होगा।