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सुविधा साड़ी 70 लाख गबन मामला: वाराणसी कोर्ट ने आरोपी सौरभ गुप्ता की डिफॉल्ट जमानत अर्जी खारिज, वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने रखा पक्ष



 07/Jul/26

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वाराणसी के सुविधा साड़ी 70 लाख रुपये के कथित गबन व धोखाधड़ी मामले में अदालत ने आरोपी सौरभ गुप्ता की डिफॉल्ट जमानत अर्जी खारिज कर दी। वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने प्रभावी पैरवी की।

सुविधा साड़ी 70 लाख गबन मामला: वाराणसी कोर्ट ने आरोपी सौरभ गुप्ता की डिफॉल्ट जमानत अर्जी खारिज, वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने रखा पक्ष

वाराणसी। सुविधा साड़ी में बतौर मैनेजर-अकाउंटेंट कार्यरत रहते हुए करीब 70 लाख रुपये के कथित धोखाधड़ी व गबन के मामले में आरोपी सौरभ गुप्ता को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर जिला जज (षष्ठम) आलोक कुमार की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की डिफॉल्ट जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामले में वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखते हुए जमानत का विरोध किया।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है। ऐसे में आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का लाभ दिए जाने का आधार नहीं बनता।

70 लाख रुपये के गबन का है आरोप

अभियोजन के अनुसार, अर्दली बाजार निवासी व्यवसायी देवानंद सेवारमानी (सप्पू) ने कैंट थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप लगाया था कि उनकी फर्म "सुविधा साड़ी" में 26 जनवरी 2020 से सौरभ गुप्ता बतौर मैनेजर-अकाउंटेंट कार्यरत था। उसकी नियुक्ति फर्म के चार्टर्ड अकाउंटेंट संजय कुमार गुप्ता की सिफारिश पर की गई थी।

वादी के अनुसार, फर्म में गुजरात, दिल्ली, कोलकाता, जयपुर और सूरत सहित विभिन्न राज्यों के व्यापारियों से साड़ियों की खरीद होती थी। भुगतान की पूरी प्रक्रिया सौरभ गुप्ता संभालता था। बैंक स्टेटमेंट की जांच के दौरान पता चला कि फर्म के खाते से ग्रीन सॉल्यूशन, स्काई लाइन वेव सॉल्यूशन और स्प्रिंट एशिया नामक तीन फर्मों के खातों में लगभग 70 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए, जबकि इन फर्मों से उनका कोई व्यापारिक संबंध नहीं था।

पूछताछ के बाद फरार हुआ आरोपी

एफआईआर के मुताबिक जब सौरभ गुप्ता से इन लेन-देन के बारे में पूछताछ की गई तो उसने कुछ दिनों का समय मांगा और अगले ही दिन मोबाइल बंद कर नौकरी छोड़कर फरार हो गया। इसके बाद सीए संजय गुप्ता से जानकारी मांगी गई, लेकिन उन्होंने भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

जांच में वादी को जानकारी मिली कि जिन तीन फर्मों में पैसा भेजा गया, वे कथित तौर पर सौरभ गुप्ता द्वारा फर्जी तरीके से संचालित की जा रही थीं और उनके बैंक खाते खुलवाने में सीए संजय गुप्ता ने सहयोग किया था।

कई लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

इस मामले में पुलिस ने सौरभ गुप्ता, उसके पिता राजेश गुप्ता, सीए संजय गुप्ता तथा संबंधित फर्मों के विरुद्ध धोखाधड़ी, गबन और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

पहले भी नहीं मिली थी राहत

इस प्रकरण में आरोपी की नियमित जमानत अर्जी 9 अप्रैल को निचली अदालत से खारिज हो चुकी है। इसके बाद आरोप पत्र दाखिल होने के आधार पर डिफॉल्ट जमानत की मांग की गई, जिसे भी अदालत ने अस्वीकार कर दिया। इससे पहले 2 जून को इलाहाबाद हाईकोर्ट भी आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर चुका है।

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