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वाराणसी में रेस्पिरेटरी कॉन्क्लेव-2026: श्वांस रोगों के आधुनिक इलाज पर देश-विदेश के विशेषज्ञों का मंथन, 300 से अधिक चिकित्सक हुए शामिल



 06/Jul/26

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वाराणसी में रेस्पिरेटरी कॉन्क्लेव-2026: श्वांस रोगों के आधुनिक इलाज पर विशेषज्ञों का मंथन

ब्रेथ ईजी हॉस्पिटल की पहल पर वाराणसी में आयोजित रेस्पिरेटरी कॉन्क्लेव-2026 में देश-विदेश के 300 से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अस्थमा, टीबी, स्लीप एप्निया, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तृत चर्चा की।


 

वाराणसी।श्वांस एवं फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की बढ़ती चुनौती और उनके आधुनिक उपचार पर चिकित्सकों को नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ब्रेथ ईजी चेस्ट फाउंडेशन फॉर ह्यूमैनिटी, ब्रेथ ईजी टीबी, चेस्ट एवं एलर्जी केयर हॉस्पिटल (अस्सी, वाराणसी), इंडियन चेस्ट सोसाइटी, आईएमए वाराणसी चैप्टर तथा उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल के संयुक्त तत्वावधान में 5 जुलाई 2026 को होटल रिवातास, वाराणसी में रेस्पिरेटरी कॉन्क्लेव-2026 एवं चिकित्सकीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

राष्ट्रीय स्तर की इस संगोष्ठी में देश-विदेश से आए 300 से अधिक प्रख्यात चिकित्सकों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि 10 हजार से अधिक चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल की ओर से प्रतिभागी चिकित्सकों को तीन मेडिकल एकेडमिक क्रेडिट पॉइंट भी प्रदान किए गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद, आईएमएस-बीएचयू के निदेशक डॉ. एस.एन. संखवार, डीन डॉ. संजय गुप्ता, वाराणसी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार, जेसीएस इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के चेयरमैन डॉ. जे.सी. सूरी, केजीएमयू लखनऊ के प्रो. डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी, सीएमआरआई कोलकाता के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. राजाधर, ब्रेथ ईजी हॉस्पिटल के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. एस.के. पाठक, डॉ. आशीष टंडन, डॉ. आलोक नाथ तथा ब्रेथ ईजी हॉस्पिटल की निदेशिका डॉ. सुनीता पाठक ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद ब्रेथ ईजी द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका "बी.ई. टाइम्स" का विमोचन किया गया। डॉ. सुनीता पाठक ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए स्मृति चिन्ह भेंट किए।

मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे वैज्ञानिक आयोजन चिकित्सकों को नवीनतम शोध, आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और क्लीनिकल अनुभवों से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान लगातार विकसित हो रहा है, इसलिए चिकित्सकों का निरंतर अपडेट रहना आवश्यक है। उन्होंने आयोजन को ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताते हुए डॉ. एस.के. पाठक एवं उनकी टीम को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

रेस्पिरेटरी कॉन्क्लेव-2026 के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी एवं वरिष्ठ श्वांस एवं टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.के. पाठक ने बताया कि ब्रेथ ईजी के प्रयास से भारत में इस प्रकार की यह तेरहवीं राष्ट्रीय चिकित्सकीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य चिकित्सकों को गंभीर श्वांस रोगों के आधुनिक उपचार, नई तकनीकों और शोध से अवगत कराना है, जिससे मरीजों को कम समय और कम खर्च में बेहतर उपचार मिल सके। उन्होंने अस्थमा, टीबी और अन्य श्वांस रोगों के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए समय पर जांच और सही उपचार की आवश्यकता पर बल दिया।

जेसीएस इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के चेयरमैन डॉ. जे.सी. सूरी ने स्लीप एप्निया के आधुनिक प्रबंधन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अब पारंपरिक सीपैप मशीनों के साथ-साथ स्मार्ट एवं ट्रैवल फ्रेंडली डिवाइस उपलब्ध हैं, जो मरीज की सांस लेने के पैटर्न के अनुसार स्वतः हवा का दबाव नियंत्रित करते हैं। उन्होंने बताया कि गले की मांसपेशियों को शिथिल होने से रोकने वाली नई दवाओं पर भी शोध जारी है। साथ ही वजन कम करने वाली आधुनिक दवाओं और जीवनशैली में बदलाव को कॉम्बिनेशन थेरेपी के रूप में अपनाया जा रहा है।

केजीएमयू लखनऊ के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन पर विशेष कार्यशाला आयोजित की। उन्होंने कठिन अस्थमा के मामलों में सही इनहेलर तकनीक, दवाओं के नियमित उपयोग, ट्रिगर्स की पहचान, सह-रुग्णताओं की जांच तथा फेफड़ों को मजबूत बनाने वाले व्यायामों के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।

सीएमआरआई, कोलकाता के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. राजाधर ने बताया कि टीबी ठीक होने के बाद भी मरीजों में ब्रोंकिइक्टेसिस, पल्मोनरी फाइब्रोसिस, कैविटी एवं एस्परजिलोमा, क्रोनिक एयरवे ऑब्स्ट्रक्शन जैसी गंभीर समस्याएं विकसित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों की नियमित निगरानी और समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक है।

प्रयागराज के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. आशीष टंडन ने कहा कि फेफड़ों एवं छाती से जुड़ी बीमारियों के सटीक निदान में रेडियोलॉजी की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है। आधुनिक एक्स-रे, सीटी स्कैन और अन्य इमेजिंग तकनीकों के बिना फेफड़ों की अधिकांश बीमारियों का सही निदान संभव नहीं है।

एसजीपीजीआई, लखनऊ के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. आलोक नाथ ने गर्भावस्था में अस्थमा के सुरक्षित एवं प्रभावी प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं को अस्थमा की दवाओं से डरने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित अस्थमा मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए दवाओं की तुलना में अधिक खतरनाक हो सकता है।

समापन सत्र में पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने चेस्ट मेडिसिन से जुड़े कई जटिल मामलों का विश्लेषण करते हुए युवा चिकित्सकों को सही समय पर सही उपचार के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि ब्रेथ ईजी द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी पूर्वांचल के चिकित्सकों को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने डॉ. एस.के. पाठक के चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान की भी सराहना की।

कार्यक्रम के अंत में रेस्पिरेटरी कॉन्क्लेव-2026 के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. एस.के. पाठक ने सभी विशेषज्ञ फैकल्टी सदस्यों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया तथा उपस्थित चिकित्सकों, मीडिया प्रतिनिधियों और ऑनलाइन जुड़े सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

Category

Health | Medical | Varanasi

Focus Keywords

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वाराणसी के होटल रिवातास में आयोजित रेस्पिरेटरी कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन अवसर पर दीप प्रज्ज्वलित करते मुख्य अतिथि एवं देश के प्रख्यात श्वांस रोग विशेषज्ञ।

Respiratory Conclave 2026 at Hotel Rivatas Varanasi organised by Breath Easy Hospital with leading pulmonologists from across India.

वाराणसी में आयोजित रेस्पिरेटरी कॉन्क्लेव-2026 में देश-विदेश के 300 से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों ने श्वांस एवं फेफड़ों की बीमारियों के आधुनिक उपचार, नई तकनीकों और शोध पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में 10 हजार से अधिक लोग ऑनलाइन भी जुड़े।


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