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गाण्डीव अखबार से जुड़ी रचना अरोड़ा, मीरा अरोड़ा और राजकुमार बाजपेयी करोड़ों रुपये की कथित प्रॉपर्टी डील मामले में गईं जेल



 30/Jun/26

वाराणसी के चर्चित सांध्यकालीन समाचार पत्र "गाण्डीव" से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के प्रॉपर्टी विवाद में पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है। इस मामले में रचना अरोड़ा, मीरा अरोड़ा और राजकुमार बाजपेयी को गिरफ्तार करने के बाद विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। अदालत ने तीनों की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।

गाण्डीव अखबार का वाराणसी की पत्रकारिता में रहा है विशेष स्थान

वाराणसी की पत्रकारिता के इतिहास में गाण्डीव समाचार पत्र का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। एक समय ऐसा था जब शहर के व्यापारी, अधिवक्ता, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आम नागरिक शाम के समय गाण्डीव की सुर्खियों का इंतजार किया करते थे। अपने दौर में यह अखबार शहर के सबसे चर्चित सांध्यकालीन समाचार पत्रों में गिना जाता था।

प्रचलित विवरणों के अनुसार, गाण्डीव समाचार पत्र की स्थापना स्वर्गीय डॉ. भगवान दास अरोड़ा ने की थी। प्रख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग टंडन के अनुसार, भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद जब डॉ. भगवान दास अरोड़ा वाराणसी आए, तब शहर के प्रतिष्ठित चिकित्सक एवं पूर्व विधायक कैलाश टंडन ने उन्हें सहयोग दिया। उस समय वे मुख्य रूप से उर्दू जानते थे। बाद में उन्होंने हिंदी सीखी और गाण्डीव समाचार पत्र की शुरुआत की, जिसने वर्षों तक वाराणसी की पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, चौखम्भा निवासी एवं बनारसी साड़ी व्यवसायी आनंद कृष्ण अग्रवाल को मलदहिया स्थित नील कॉटेज कॉलोनी में "बरकत भवन" नामक मकान दिखाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें बताया गया कि यह संपत्ति मीरा अरोड़ा और रचना अरोड़ा के स्वामित्व में है तथा इसकी कीमत 3 करोड़ 20 लाख रुपये तय की गई।

शिकायत के अनुसार, उन्हें यह भी बताया गया कि मकान बैंक में बंधक है और बैंक का ऋण चुकाने के बाद संपत्ति बंधकमुक्त कराकर उनके पक्ष में बैनामा कर दिया जाएगा।

एफआईआर के अनुसार, 23 मई 2025 को 10 लाख रुपये चेक के माध्यम से दिए गए। इसके बाद 10 जून 2025 को 65 लाख रुपये तथा 75 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से स्थानांतरित किए गए। इस प्रकार शिकायतकर्ता ने 1 करोड़ 50 लाख रुपये ऑनलाइन भुगतान करने का दावा किया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में 500 रुपये के स्टाम्प पेपर पर विक्रय अनुबंध तैयार किया गया। इसके उपरांत बैंक का नो-ड्यूज प्रमाणपत्र दिखाकर 10 अगस्त 2025 को गांडीव कार्यालय में 1 करोड़ 50 लाख रुपये नकद भी लिए गए। इस प्रकार कुल 3 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का दावा किया गया है।

नगर निगम के रिकॉर्ड के बाद दर्ज कराई शिकायत

एफआईआर के अनुसार, जब शिकायतकर्ता ने मूल दस्तावेज मांगे तो उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए। बाद में नगर निगम का रिकॉर्ड देखने पर संपत्ति के स्वामित्व को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके साथ कथित रूप से धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की ठगी की गई।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पैसा वापस मांगने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई, जिसके बाद पुलिस कमिश्नरेट में शिकायत दर्ज कराई गई।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 351(2) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया। जांच के बाद पुलिस ने रचना अरोड़ा, मीरा अरोड़ा और राजकुमार बाजपेयी को गिरफ्तार कर लिया।

कोर्ट ने भेजा न्यायिक अभिरक्षा में

सोमवार को तीनों आरोपियों को विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कृष्ण कुमार की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया। साथ ही उनकी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी गई। अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन अधिकारी मधुसूदन तिवारी ने पैरवी की।

मामला विचाराधीन

यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। इस समाचार में वर्णित तथ्य एफआईआर, पुलिस की कार्रवाई तथा अदालत में हुई कार्यवाही पर आधारित हैं। एफआईआर में दर्ज आरोप शिकायतकर्ता के हैं। आरोपों की अंतिम सत्यता का निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर किया जाएगा।

Clown Times News Desk
वाराणसी


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