बढ़ते शहरीकरण के बीच हरियाली बचाने की पहल, डोमरी और कंचनपुर के बाद सारंगतालाब को बनाया जाएगा नया ऑक्सीजन हब
वाराणसी, 13 जून। शहर में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और घटती हरियाली के बीच पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए नगर निगम ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सारंगनाथ चौराहा स्थित सारंगतालाब क्षेत्र में शनिवार को शहर के तीसरे मियावाकी वन (अर्बन फॉरेस्ट) की शुरुआत की गई। यहां 40 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे, जिससे क्षेत्र को घने शहरी जंगल के रूप में विकसित किया जा सके।
इस अभियान का शुभारंभ प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जनपद के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने महापौर अशोक कुमार तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या और कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव के साथ संयुक्त रूप से पौधारोपण कर किया। कार्यक्रम के दौरान पीपल, पाकड़, जामुन, बरगद, गुलमोहर, अमलताश और मौलश्री समेत 20 प्रजातियों के पौधे रोपे गए।
इस अवसर पर सुरेश खन्ना ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। मियावाकी पद्धति से विकसित होने वाले वन न केवल हरियाली बढ़ाएंगे, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण और शुद्ध वातावरण उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि नगर निगम वाराणसी शहर को एक बड़े ‘ऑक्सीजन हब’ के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। डोमरी और कंचनपुर में मियावाकी तकनीक से तैयार किए गए वनों की सफलता के बाद अब सारंगतालाब को भी घने हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। मियावाकी तकनीक के तहत पौधे सामान्य पौधारोपण की तुलना में कई गुना तेजी से विकसित होते हैं और कम समय में घना वन तैयार हो जाता है।
गौरतलब है कि इससे पहले नगर निगम ने डोमरी (सुजाबाद) में लगभग 350 बीघा क्षेत्र में एक घंटे के भीतर 2,51,446 पौधे लगाकर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था। इसी क्रम में अब सारंगतालाब परियोजना को ‘ग्रीन काशी’ अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, जोनल अधिकारी कृष्ण चंद्र, पार्षद बलराम कन्नौजिया, राजकपूर चौधरी, अशोक मौर्या सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।