बिजलिकर्मियो ने कहा 03 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री एवं शासन स्तर पर हुए लिखित समझौते का पालन किया जाये एवं मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्यवाहियां , उन पर दर्ज एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानों पर किए गए स्थानांतरण तथा अन्य दमनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए
वाराणासी-25मई2026। विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ.प्र. के बैनर तले पूर्वांचल के बिजलीकर्मियों ने आज प्रदेश की विद्युत वितरण व्यवस्था के निजीकरण, कर्मचारी विरोधी नीतियों तथा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में भिखारीपुर स्थित प्रबन्ध निदेशक कार्यालय पर व्यापक प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बिजली कर्मचारी, अभियंता, जूनियर इंजीनियर, तकनीकी कर्मचारी एवं संविदा कर्मी शामिल हुए।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि ऊर्जा प्रबंधन द्वारा कर्मचारी हितों की आवाज उठाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर लगातार दमनात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियाँ की जा रही हैं। स्थानांतरण, निलंबन, अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा मानसिक दबाव बनाकर कर्मचारियों को भयभीत करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वक्ताओ ने कहा कि प्रदेश सरकार एवं ऊर्जा प्रबंधन द्वारा विद्युत सेवाओं के निजीकरण की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं, जो न केवल बिजलीकर्मियों के हितों के विरुद्ध है बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी घातक सिद्ध होगा।
वक्ताओं ने कहा कि 03 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री एवं शासन स्तर पर हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्यवाहियां , उन पर दर्ज एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानों पर किए गए स्थानांतरण तथा अन्य दमनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए। संघर्ष समिति ने 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को समाप्त करने की मांग दोहराई।
वक्ताओं ने कहा कि ऊर्जा प्रबंधन कर्मचारी संगठनों की लोकतांत्रिक गतिविधियों को दबाने का प्रयास कर रहा है। कर्मचारियों एवं संगठन पदाधिकारियों के विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण स्थानांतरण, निलंबन, चार्जशीट, वेतन रोकने तथा मानसिक उत्पीड़न जैसी कार्यवाहियाँ लगातार की जा रही हैं। इससे पूरे बिजलीकर्मियों में भारी रोष व्याप्त है।
वक्ताओं ने कहा कि बिजलीकर्मी हर परिस्थिति में प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति देने के लिए दिन-रात कार्य करते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने मई 2025 में किए गए सेवा नियमों के संशोधन को तानाशाहीपूर्ण बताते हुए कहा कि बिना जांच, बिना सुनवाई और बिना सफाई का अवसर दिए सेवा से बर्खास्त करने का प्रावधान पूरी तरह अलोकतांत्रिक एवं कर्मचारी विरोधी है। संघर्ष समिति ने फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर बड़े पैमाने पर स्थानांतरण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा बिजली कर्मियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने जैसी कार्रवाइयों को तत्काल बंद करने की मांग की। इसके अतिरिक्त ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने पर अभियंताओं एवं जूनियर इंजीनियरों से वसूली के अवैधानिक आदेश को भी तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
सभा को सर्वश्री ई. जितेन्द्र सिंह गुर्जर, ई. मायाशंकर तिवारी,महेंद्र राय,ओ0पी0 सिंह,प्रेमनाथ राय, चंद्रभूषण उपाध्याय,सूर्यदेव पाण्डेय,अखिलेश शर्मा,दलसिंगार यादव,निखिलेश सिंह,ई0 एस0के0 सिंह,रामकुमार झा,गिरीश यादव,धर्मेंद्र यादव, कृष्णा सिंह,सुरेश सिंह, वीरेंद्र सिंह,उपेंद्र चौरसिया ,दीपक पटेल,धर्मेंद्र यादव ,सुनील प्रजापति ,चंद्रजीत यादव ,नवीन सिंह,मिथिलेश यादव आदि ने संबोधित किया।