वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में व्याप्त शैक्षणिक अव्यवस्था, परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को अभाविप की महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ इकाई ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रेस वार्ता आयोजित कर प्रशासन पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया। परिषद ने 26 सूत्रीय मांग पत्र जारी करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो संगठन उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
प्रेस वार्ता में विभाग संयोजक आकाश प्रताप सिंह, महानगर मंत्री शिवम तिवारी, इकाई अध्यक्ष ओम आकाश मौर्य, इकाई मंत्री धृति सिंह समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। छात्र नेताओं ने कहा कि लंबे समय से विश्वविद्यालय प्रशासन को विभिन्न समस्याओं के संबंध में ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
महानगर मंत्री शिवम तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय में यूजी तृतीय और पंचम सेमेस्टर के परीक्षा परिणामों में भारी गड़बड़ी हुई है, जिससे छात्र अगली कक्षा में प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं। वहीं पिछले कई वर्षों से बैक पेपर के परिणाम लंबित हैं और घोषित परिणामों में भी टीआर अपडेट नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण हजारों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य संकट में है।
अभाविप ने विश्वविद्यालय परिसर में मूलभूत सुविधाओं की बदहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। संगठन के अनुसार खेल मैदान में वॉशरूम, पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था और ग्रीन नेट जैसी सुविधाएं आज तक उपलब्ध नहीं कराई गईं। मुख्य परिसर में मेस और कैंटीन की सुविधा भी बंद पड़ी है, जिससे दूर-दराज से आने वाले छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य केंद्र में केवल पैरासिटामोल उपलब्ध होने का आरोप लगाते हुए परिषद ने पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था की मांग की।
प्रेस वार्ता में विभिन्न परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए। अभाविप नेताओं ने कहा कि गंगापुर, भैरव तालाब और एनटीपीसी परिसरों की बाउंड्री वॉल जर्जर हो चुकी है, जिससे बाहरी और अराजक तत्वों का प्रवेश आसान हो गया है। विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में भी सुरक्षा जांच की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा छात्रों के लिए वाई-फाई, लाइब्रेरी और हॉस्टल सुविधाओं की भारी कमी का मुद्दा भी उठाया गया।
संगठन ने आरोप लगाया कि सत्र 2025-26 का एकेडमिक कैलेंडर अब तक जारी नहीं किया गया है और विश्वविद्यालय के कई परिसरों में शैक्षणिक गतिविधियां अनियमित रूप से संचालित हो रही हैं। वहीं शोध परीक्षा 2024-25 और यूजी अंतिम वर्ष के परिणाम जल्द घोषित करने की मांग की गई। परिषद ने Co-curricular विषय में बड़ी संख्या में छात्रों को फेल किए जाने पर भी सवाल खड़े करते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की।
अभाविप ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए। संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय में बनाए गए एसटीपी प्लांट की गुणवत्ता खराब है और वह उपयोग में नहीं है। साथ ही विभिन्न टेंडरों में गुणवत्ता की अनदेखी कर छात्रों के पैसों के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया। परिषद ने एनटीपीसी परिसर के किराये और NAAC सर्वे रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी मांग की।
एग्रीकल्चर कैंपस को लेकर भी संगठन ने गंभीर सवाल उठाए। परिषद के अनुसार बीएससी एग्रीकल्चर के छात्रों के लिए न तो पर्याप्त लैब की व्यवस्था है और न ही फील्ड वर्क की सुविधा। पिछले तीन वर्षों से कैंपस स्थानांतरण की बात कही जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके अलावा खेल गतिविधियों के अभाव, प्लेसमेंट सेल में अधिकारियों की नियुक्ति न होने और स्पोर्ट्स अलाउंस न दिए जाने पर भी नाराजगी जताई गई।
विभाग संयोजक आकाश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रशासन की उदासीनता के कारण हजारों छात्रों का भविष्य बर्बादी की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि अभाविप छात्रहित की इस लड़ाई को अंतिम चरण तक लड़ेगी। वहीं इकाई अध्यक्ष ओम आकाश मौर्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शीघ्र समस्याओं का समाधान नहीं किया तो संगठन उग्र आंदोलन करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।