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सनबीम स्कूल वरुणा में सहचर्या प्रशिक्षण सत्र का आयोजन, सीटी एवं ए.आई. आधारित शिक्षा पर हुआ मंथन



 21/May/26

सहचर्या प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञों ने बताया- ए.आई. और संगणनात्मक चिंतन है भविष्य की शिक्षा की आधारशिला

वाराणसी। बदलते वैश्विक शैक्षिक परिदृश्य में विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने तथा शिक्षा को तकनीकी, तार्किक एवं नवाचारपरक बनाने के उद्देश्य से 19 एवं 20 मई 2026 को सहचर्या प्रशिक्षण सत्र का भव्य आयोजन सनबीम स्कूल वरुणा में किया गया। दो दिवसीय यह प्रशिक्षण सत्र पूर्णतः संगणनात्मक चिंतन एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ताविषयवस्तु पर आधारित रहा, जिसमें आधुनिक शिक्षा के विविध आयामों पर गहन चर्चा एवं व्यावहारिक प्रस्तुतीकरण किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ सहचार्य सदस्यों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर सहचर्या की अध्यक्ष एवं सनबीम स्कूल वरुणा की प्राचार्या डॉ. अनुपमा मिश्रा, सचिव एवं श्रीराम कॉन्वेंट स्कूल के प्राचार्य श्री अनूप पंडित, कोषाध्यक्ष एवं सनबीम स्कूल लहरतारा की प्राचार्या सुश्री परवीन कैसर तथा संयुक्त कोषाध्यक्ष की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रशिक्षण सत्र के प्रथम चरण में सनबीम सारनाथ की सुश्री तनुजा सिंह ने खेल से अमूर्त अवधारणाओं तक: संगणनात्मक चिंतन हेतु प्रगतिशील शिक्षण पद्धतिविषय पर अत्यंत प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उन्होंने गतिविधि-आधारित शिक्षण, तार्किक विश्लेषण एवं समस्या समाधान की रणनीतियों के माध्यम से विद्यार्थियों में संगणनात्मक चिंतन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि सुश्री अमातुल्लाह नीमचवाला का अभिनंदन एवं सम्मान किया गया। सुश्री अमातुल्लाह नीमचवाला वर्तमान में लॉजिक कॉन्टेंट एंड प्रोडक्ट विभाग में एसोसिएट डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं तथा बच्चों में संगणनात्मक चिंतन एवं समस्या समाधान क्षमता विकसित करने हेतु उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षण सामग्री निर्माण में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं।उन्होंने सीबीएसई की संगणनात्मक चिंतन पाठ्यचर्या पुस्तकों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाठ्यवस्तु की अवधारणा, रूपरेखा निर्धारण, प्रश्न संरचना एवं शिक्षण गुणवत्ता को विकसित करने में उनका विशेष योगदान रहा है। उनका कार्य बच्चों के संज्ञानात्मक विकास के साथ तार्किक चिंतन एवं संगणनात्मक कौशल को जोड़ते हुए मजबूत विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करने पर केंद्रित है। उन्होंने कम्प्यूटेशनल सोच एवं ए.आई. पाठ्यचर्या की समझ एवं उसका प्रभावी क्रियान्वयनविषय पर विस्तृत चर्चा की, जिसमें शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं संगणनात्मक चिंतन को कक्षा शिक्षण से जोड़ने के व्यावहारिक तरीकों से अवगत कराया गया।
द्वितीय सत्र में सनबीम स्कूल भगवानपुर के डॉ. श्याम बहादुर सिंह ने मध्य स्तर पर विभिन्न विषयों में संगणनात्मक चिंतन का अंतर्विषयी समन्वयविषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाषा, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में संगणनात्मक चिंतन को समाहित कर विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित शोध-पत्र प्रस्तुतीकरण सत्र में शिक्षकों एवं शिक्षाविदों ने शिक्षा में नवाचार, तकनीकी हस्तक्षेप एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों से संबंधित अपने विचार प्रस्तुत किए।
अगले चरण में सनबीम वरुणा के श्री अंकित वर्मा ने वास्तविक जीवन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोगविषय पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार एवं दैनिक जीवन में ए.आई. की उपयोगिता एवं उसके दूरगामी प्रभावों को उदाहरणों सहित स्पष्ट किया।
20 मई 2026 को आयोजित द्वितीय दिवस के सत्र में शिक्षाविद् श्री संदीप मुखर्जी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में शिक्षकों को समयानुकूल शिक्षण पद्धतियों को अपनाने तथा विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का संदेश दिया। पूरा प्रशिक्षण सत्र ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं भविष्य उन्मुख रहा। इस आयोजन ने शिक्षकों को आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण पद्धतियों, संगणनात्मक चिंतन एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी उपयोग से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सहभागी शिक्षकों ने इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक दूरदर्शी एवं अत्यंत उपयोगी पहल बताया। द्वितीय दिवस प्रस्तुतीकरण सत्र में शिक्षकों ने आधुनिक शिक्षण रणनीतियों, विद्यार्थी-केंद्रित अधिगम एवं कक्षा शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी उपयोग पर अपने विचार साझा करते हुए शोध-पत्र प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सहचर्या सहोदया की अध्यक्ष डॉ. अनुपमा मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षाविदों, प्रशिक्षकों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण सत्र शिक्षकों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुआ। उन्होंने आयोजन की सफलता में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों एवं संस्थानों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे नवाचारपूर्ण शैक्षिक आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने की बात कही।


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