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सनबीम स्कूल वरुणा में सहचर्या प्रशिक्षण सत्र का आयोजन, सीटी एवं ए.आई. आधारित शिक्षा पर हुआ मंथन



 20/May/26

सहचर्या प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञों ने बताया- ए.आई. और संगणनात्मक चिंतन है भविष्य की शिक्षा की आधारशिला

वाराणसी। बदलते वैश्विक शैक्षिक परिदृश्य में विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने तथा शिक्षा को तकनीकी, तार्किक एवं नवाचारपरक बनाने के उद्देश्य से 19 एवं 20 मई 2026 को सहचर्या प्रशिक्षण सत्र का भव्य आयोजन Sunbeam School Varuna में किया गया। दो दिवसीय यह प्रशिक्षण सत्र पूर्णतः संगणनात्मक चिंतन एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ताविषयवस्तु पर आधारित रहा, जिसमें आधुनिक शिक्षा के विविध आयामों पर गहन चर्चा एवं व्यावहारिक प्रस्तुतीकरण किए गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ सहचर्या सदस्यों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर सहचर्या की अध्यक्ष एवं डॉ. अनुपमा मिश्रा, सचिव एवं Shri Ram Convent School के प्राचार्य अनूप पंडित, कोषाध्यक्ष एवं Sunbeam School Lahartara की प्राचार्या परवीन कैसर सहित अन्य गणमान्य लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रशिक्षण सत्र के प्रथम चरण में Sunbeam Sarnath की तनुजा सिंह ने खेल से अमूर्त अवधारणाओं तक: संगणनात्मक चिंतन हेतु प्रगतिशील शिक्षण पद्धतिविषय पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उन्होंने गतिविधि आधारित शिक्षण, तार्किक विश्लेषण एवं समस्या समाधान की रणनीतियों के माध्यम से विद्यार्थियों में संगणनात्मक चिंतन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि अमातुल्लाह नीमचवाला का अभिनंदन एवं सम्मान किया गया। वर्तमान में लॉजिक कंटेंट एंड प्रोडक्ट विभाग में एसोसिएट डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत अमातुल्लाह नीमचवाला बच्चों में संगणनात्मक चिंतन एवं समस्या समाधान क्षमता विकसित करने हेतु उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षण सामग्री निर्माण में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं। उन्होंने सीबीएसई की संगणनात्मक चिंतन पाठ्यचर्या पुस्तकों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कम्प्यूटेशनल सोच एवं ए.आई. पाठ्यचर्या की समझ एवं उसका प्रभावी क्रियान्वयनविषय पर विस्तृत चर्चा करते हुए शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं संगणनात्मक चिंतन को कक्षा शिक्षण से जोड़ने के व्यावहारिक तरीकों से अवगत कराया।

द्वितीय सत्र में Sunbeam School Bhagwanpur के डॉ. श्याम बहादुर सिंह ने मध्य स्तर पर विभिन्न विषयों में संगणनात्मक चिंतन का अंतर्विषयी समन्वयविषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भाषा, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में संगणनात्मक चिंतन को समाहित कर विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित शोध-पत्र प्रस्तुतीकरण सत्र में शिक्षकों एवं शिक्षाविदों ने शिक्षा में नवाचार, तकनीकी हस्तक्षेप एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों से संबंधित अपने विचार प्रस्तुत किए।

अगले चरण में Sunbeam School Varuna के अंकित वर्मा ने वास्तविक जीवन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोगविषय पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार एवं दैनिक जीवन में ए.आई. की उपयोगिता एवं उसके दूरगामी प्रभावों को उदाहरणों सहित स्पष्ट किया।

20 मई 2026 को आयोजित द्वितीय दिवस के सत्र में शिक्षाविद् संदीप मुखर्जी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में शिक्षकों को समयानुकूल शिक्षण पद्धतियों को अपनाने तथा विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का संदेश दिया।

द्वितीय दिवस के प्रस्तुतीकरण सत्र में शिक्षकों ने आधुनिक शिक्षण रणनीतियों, विद्यार्थी-केंद्रित अधिगम एवं कक्षा शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी उपयोग पर अपने विचार साझा करते हुए शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

समापन अवसर पर सहचर्या सहोदया की अध्यक्ष डॉ. अनुपमा मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षाविदों, प्रशिक्षकों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण सत्र शिक्षकों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं भविष्य उन्मुख सिद्ध हुआ।

 


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