वादी मुकुंद यादव ने अपने अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव एवं धनंजय कुमार के माध्यम से बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि हरतीरथ चौराहे पर उनकी तीन दुकानें हैं, जिनमें जनरल स्टोर, चाय-दही-मलाई तथा बिल्डिंग मैटेरियल और सीमेंट की दुकान संचालित होती है। इसी व्यापार से उनका परिवार जीविकोपार्जन करता है।
आरोप लगाया गया कि विपक्षी उमेश सिंह और मुकेश सिंह कुछ दिनों पूर्व उनकी एक दुकान अपने कब्जे में लेने की मांग कर रहे थे। जब उन्होंने दुकान देने से इंकार कर दिया तो विपक्षी नाराज हो गए और किसी भी कीमत पर दुकान हासिल करने की धमकी दी।
वादी के अनुसार 18 मार्च 2026 की शाम करीब चार बजे उमेश सिंह, मुकेश सिंह और कुणाल सिंह उर्फ गोलू अपने 12 से 15 अज्ञात साथियों के साथ हरतीरथ स्थित उनके मकान में जबरन घुस आए। आरोप है कि आरोपियों ने बिल्डिंग मैटेरियल का सामान तोड़फोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया। विरोध करने पर व्यवसायी के साथ मारपीट की गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। साथ ही लगभग डेढ़ लाख रुपये के नुकसान और दुकान में रखा कीमती सामान उठा ले जाने का भी आरोप लगाया गया।
प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया कि घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। उल्टे हिन्दू युवा वाहिनी के दबाव में कोतवाली पुलिस ने उमेश सिंह की ओर से 25 मार्च 2026 को दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर मुकुंद यादव के खिलाफ ही विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।
मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अनुज यादव ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि वादी को न्याय दिलाने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है। अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कोतवाली पुलिस को आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी किया।