“Research, Innovation & Farmer-Centric Technology at the Core of Agricultural Growth”
वाराणसी। Banaras Hindu University के कृषि विज्ञान संस्थान में शुक्रवार को वार्षिक दिवस 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी, पुरातन छात्र और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अतिथियों ने सहभागिता करते हुए संस्थान की शैक्षणिक, अनुसंधान, नवाचार और प्रसार गतिविधियों की उपलब्धियों पर चर्चा की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि वार्षिक दिवस जैसे आयोजन संस्थान के प्रति गौरव, एकता और आत्मीयता की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कृषि को केवल रोजगार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सेवा के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि युवा वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों की ऊर्जा, नवाचार और समर्पण विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए नवाचारपूर्ण सुझाव देने पर जोर दिया।
कुलपति ने विश्वविद्यालय में औपचारिक संवाद के लिए आधिकारिक ई-मेल के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि ई-मेल संवाद को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और उत्तरदायी बनाता है।
कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. यू.पी. सिंह के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने बताया कि कृषि संस्थानों की एनआईआरएफ रैंकिंग में संस्थान ने देश में चौथा स्थान प्राप्त किया है। संस्थान को “क्लैरिवेट इंडिया रिसर्च एक्सीलेंस साइटेशन अवार्ड 2025” सहित कई राष्ट्रीय सम्मान भी मिले हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने 312 शोध पत्र, 77 पुस्तक अध्याय और 11 पुस्तकों का प्रकाशन किया। इस अवधि में लगभग 35 करोड़ रुपये की 20 शोध परियोजनाएं प्राप्त हुईं तथा 10 पेटेंट दाखिल किए गए, जिनमें से सात स्वीकृत हो चुके हैं।
संस्थान द्वारा “मालवीय निधि” सरसों, “मालवीय मनीला सिंचित धान-1” और “मालवीय धान 105 सब-1” जैसी उन्नत फसल प्रजातियां विकसित की गई हैं। किसानों के लिए शून्य जुताई, धान की सीधी बुआई, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन और समेकित कीट प्रबंधन जैसी तकनीकों को विभिन्न राज्यों में बढ़ावा दिया जा रहा है।
पशुपालकों के लिए “गोट गुरु” और “कैटल गुरु” नामक द्विभाषी मोबाइल एप भी विकसित किए गए हैं, जिनके माध्यम से पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्नत भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के जरिए साहीवाल नस्ल के छह स्वस्थ बछड़ों का सफल जन्म भी कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान “कृषि विज्ञान संस्थान एवं कृषि विज्ञान केंद्र की प्रतिवेदन रिपोर्ट” और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 आधारित अध्यादेश का विमोचन किया गया। उद्यान विज्ञान विभाग के डॉ. अनिल कुमार सिंह द्वारा लिखित पुस्तक “फूलों की वैज्ञानिक खेती” का भी लोकार्पण हुआ।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को विभिन्न उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। लगभग चार हजार पुरातन छात्रों के सहयोग से निर्मित “आभा अतिथि गृह” का उल्लेख संस्थान और पूर्व छात्रों के मजबूत संबंधों के प्रतीक के रूप में किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंकिता हुड्डा और डॉ. विजई पांडुरंगम ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अमित राज गुप्ता ने प्रस्तुत किया।
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