बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष अग्रवाल ने की। व्यापारियों का कहना था कि प्रधानमंत्री की यह अपील भले ही देश की आर्थिक परिस्थितियों और विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से की गई हो, लेकिन इसका सीधा असर सोने के बाजार, ज्वेलरी कारोबार और कारीगरों की आजीविका पर पड़ सकता है।
बैठक में शामिल सर्राफा कारोबारियों ने कहा कि भारत में सोना केवल निवेश का साधन नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अहम हिस्सा है। शादी-विवाह, त्योहार और पारिवारिक आयोजनों में सोने की खरीदारी एक परंपरा के रूप में देखी जाती है। ऐसे में यदि एक वर्ष तक सोने की खरीद में कमी आती है, तो इसका असर सीधे बाजार की मांग पर दिखाई देगा।
व्यापारियों ने चिंता जताई कि मांग घटने से ज्वेलरी निर्माण कार्य भी प्रभावित होगा, जिससे कारीगरों को मिलने वाला रोजगार कम हो सकता है। वाराणसी जैसे पारंपरिक स्वर्णकारी केंद्र में हजारों कारीगर इस उद्योग से जुड़े हुए हैं, जिनकी आजीविका पर संकट खड़ा होने की आशंका है।
बैठक में मौजूद सदस्यों ने कहा कि बड़े कारोबारियों की तुलना में छोटे सुनार, पारंपरिक आभूषण निर्माता और स्थानीय कारीगर इस स्थिति से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। उत्पादन में कमी आने से न केवल काम घटेगा बल्कि कई परिवारों की आय पर भी असर पड़ सकता है।
कुछ व्यापारियों ने यह भी कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियों का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन साथ ही सर्राफा उद्योग की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए संतुलित कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
वाराणसी सर्राफा एसोसिएशन की बैठक में यह सुझाव भी सामने आया कि यदि सोने की खरीद पर रोक या कमी की अपील की जाती है, तो सरकार को इसके साथ-साथ कारीगरों और छोटे व्यापारियों के लिए वैकल्पिक रोजगार योजनाएं और आर्थिक राहत पैकेज पर भी विचार करना चाहिए।
व्यापारियों का कहना था कि सर्राफा उद्योग केवल व्यापार नहीं बल्कि एक बड़ा रोजगार आधारित क्षेत्र है, जो लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जोड़ता है।
बैठक का संचालन एसोसिएशन के महामंत्री रवि सर्राफ ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन पवन मिश्रा द्वारा दिया गया।
इस दौरान प्रमुख रूप से प्रद्युम्न जी अग्रवाल, सुमित वर्मा “चंदू”, संजय अग्रवाल, राघव दवे, जतिन रस्तोगी, गोपाल उपाध्याय “बमभोले”, पंकज सर्राफ, कमल कुमार सिंह, किशोर सेठ, विष्णु दयाल, सौरभ अग्रवाल, राहुल जायसवाल, गणेश कसेरा सहित कई सर्राफा कारोबारी एवं कारीगर मौजूद रहे।
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