श्रद्धा, संस्कृति और ज्ञान का संगम—सारनाथ में गूंजा विश्व शांति का संदेश
सारनाथ में बुद्ध पूर्णिमा 2026 पर भव्य बौद्ध महोत्सव, 1 लाख श्रद्धालु शामिल। प्रतियोगिताएं, धम्म देशना और विश्व शांति का संदेश बना आकर्षण।
लखनऊ/सारनाथ, 1 मई 2026: बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर सारनाथ में आयोजित ‘बौद्ध महोत्सव’ श्रद्धा, ज्ञान और संस्कृति का भव्य संगम बनकर उभरा। भगवान गौतम बुद्ध की 2570वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया और बुद्ध अस्थि धातु के दर्शन कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
इस भव्य आयोजन का संचालन अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश), महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया तथा इंडो-श्रीलंका जम्बू द्वीप बुद्ध विहार, सारनाथ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
मूलगंध कुटी विहार में दर्शन और ज्ञान का संगम
कार्यक्रम के दौरान मूलगंध कुटी विहार में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। दर्शन के पश्चात “विश्व शांति के लिए तथागत बुद्ध” विषय पर निबंध, चित्रकला और पेंटिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के 200 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रतियोगिताओं में उभरी बाल प्रतिभाएं
चित्रकला प्रतियोगिता में शीणा ने प्रथम स्थान, सिद्धि जायसवाल ने द्वितीय स्थान और आरव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त अंकित प्रजापति, अदिति भारद्वाज, सौभाग्य तिवारी, परी और आनंदी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।
इसी प्रकार निबंध प्रतियोगिता में रत्न प्रिया ने प्रथम, पीहू सिंह ने द्वितीय और लक्ष्मीना ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं कृष्ण अवतार, आकांक्षा, दर्शिता पाण्डेय, सिमर प्रजापति और शीतला प्रसाद को सांत्वना पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
धम्म देशना, विपश्यना और विचार मंथन
महोत्सव के दौरान धम्म देशना, विपश्यना साधना और विचार गोष्ठियों का भी आयोजन किया गया। वक्ताओं ने भगवान बुद्ध के उपदेशों को व्यवहारिक जीवन में अपनाने पर बल दिया और समाज में शांति, करुणा तथा सहिष्णुता के महत्व को रेखांकित किया।
श्रद्धालुओं के लिए पूरे दिन निःशुल्क भोजन की व्यवस्था की गई, जिससे सेवा भाव और करुणा का संदेश और सशक्त रूप से प्रसारित हुआ।
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया बुद्ध पूर्णिमा का महत्व
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जीवन की तीन प्रमुख घटनाओं—लुंबिनी में जन्म, बोधगया में ज्ञान प्राप्ति और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण—से जुड़ी हुई है, जो इस दिन को अत्यंत पवित्र बनाती हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश आज भी विश्व को शांति और करुणा का मार्ग दिखा रहा है। सारनाथ में आयोजित ऐसे कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और वैश्विक शांति का संदेश भी फैलाते हैं।
विद्वानों और भिक्षुओं की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में भिक्षु सुमित्थानंद, भिक्षु शीलवंश, डॉ. के. सिरी सुमेध थेरो, डॉ. राकेश सिंह, डॉ. बिंजुलम पुण्यसार और अरुणेश कुमार मिश्र सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। सभी वक्ताओं ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए बुद्ध के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
शोध पत्रिका “धी” का विमोचन
इस अवसर पर केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ एवं अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में शान्तरक्षित ग्रंथालय लॉन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. वड्छुग दोर्जे नेगी ने की।
इस दौरान संस्थान की शोध पत्रिका “धी” का 66वां अंक भगवान बुद्ध को समर्पित करते हुए विमोचित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त कर आयोजन को ज्ञानवर्धक बनाया।