वाराणसी, 30 अप्रैल 2026: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केन्द्र के तत्वावधान में ‘भारत अध्ययन साहित्य संवाद’ श्रृंखला के अंतर्गत प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी की पुस्तक ‘चंदन किवाड़’ का लोकार्पण एवं परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में साहित्य, लोक परंपरा और सांस्कृतिक विमर्श पर व्यापक चर्चा हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति अजित कुमार चतुर्वेदी ने की। उन्होंने कहा कि पुस्तकें लेखक और पाठक के अलग-अलग दृष्टिकोण का दर्पण होती हैं। ‘चंदन किवाड़’ को उन्होंने आत्मकथात्मक स्वरूप की कृति बताया, जिसमें लेखिका के जीवन, अनुभव और लोक-संवेदना का गहरा संबंध दिखाई देता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के बौद्धिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशिष्ट वक्ता अवधेश प्रधान ने पुस्तक को “चाक्षुष यज्ञ और श्रुत यज्ञ” बताते हुए कहा कि यह कृति पाठक के मन और हृदय को गहराई से स्पर्श करती है। उन्होंने मालिनी अवस्थी के साहित्यिक पक्ष को उनके संगीत जितना ही प्रभावशाली बताया।
लेखकीय वक्तव्य में मालिनी अवस्थी ने कहा कि पुस्तक का लेखन उन्होंने अपनी यात्राओं के दौरान किया। उन्होंने लोकगीतों के मनोविज्ञान और समाजशास्त्र पर और अधिक शोध की आवश्यकता बताई तथा यह भी कहा कि संस्कृत ने उन्हें भारतीय परंपरा को समझने की व्यापक दृष्टि प्रदान की।
हिन्दी विभाग के अध्यक्ष वशिष्ठ द्विवेदी ने कहा कि यह पुस्तक लोक की पीड़ा और संवेदना को जीवंत करती है। वहीं अर्चना वर्मा ने इसे भावनात्मक गहराई से लिखी गई कृति बताते हुए कहा कि ‘चंदन’ और ‘किवाड़’ प्रतीकात्मक रूप से लोक-संस्कृति के द्वार को खोलते हैं।
कार्यक्रम में भारत अध्ययन केन्द्र के समन्वयक शरदिन्दु तिवारी ने स्वागत वक्तव्य दिया और बताया कि मालिनी अवस्थी संस्थापक सदस्यों में रही हैं। संचालन डॉ. अमित कुमार पाण्डेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्ञानेंद्र नारायण राय ने दिया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में संकाय सदस्य, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने लोक-साहित्य और आधुनिक विमर्श के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु स्थापित किया।