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पोषण निगरानी ऐप से कुपोषण पर वार, डेटा आधारित फैसलों से बेहतर होगी देखभाल



 25/Apr/26

डिजिटल मॉनिटरिंग से समय रहते पहचान और इलाज पर जोर

नई दिल्ली : देश में कुपोषण से निपटने के लिए डेटा आधारित निर्णयों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सिस्टम और पोषण निगरानी ऐप के जरिए बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित मॉनिटरिंग कर समय रहते जोखिम की पहचान की जा सकती है।

वैश्विक स्वास्थ्य और पोषण विशेषज्ञ प्रो. लिंडसे जैक्स के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ डेटा केवल संग्रह तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे निर्णय लेने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने में उपयोग करना जरूरी है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 2021 में लॉन्च किया गया पोषण निगरानी ऐप इसी दिशा में एक अहम कदम है।

इस ऐप का उद्देश्य पोषण सेवाओं के डेटा को अधिक प्रभावी बनाना और आंगनवाड़ी स्तर पर सेवाओं की निगरानी को मजबूत करना है। नियमित वृद्धि मापनजैसे वजन और लंबाईके जरिए बच्चों में कुपोषण के शुरुआती संकेतों की पहचान की जा सकती है, जिससे समय पर हस्तक्षेप संभव हो पाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डेटा को सही तरीके से रिकॉर्ड और विश्लेषित किया जाए, तो यह पता लगाया जा सकता है कि किन उम्र समूहों या मौसम में कुपोषण का खतरा ज्यादा होता है। इससे लक्षित रणनीति बनाकर पोषण सेवाओं में सुधार किया जा सकता है।

इसके साथ ही, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए सरल चेकलिस्ट, अलर्ट सिस्टम और प्रशिक्षण सामग्री जैसे माइक्रो-वीडियो ऐप में शामिल किए जा रहे हैं, जिससे वे कुपोषित बच्चों की बेहतर पहचान और देखभाल कर सकें। स्वास्थ्य मंत्रालय के अन्य पोर्टल्स के साथ डेटा इंटीग्रेशन से रेफरल और फॉलो-अप प्रक्रिया भी मजबूत होगी।

हालांकि, कई क्षेत्रों में डिजिटल सिस्टम के साथ कागजी रिकॉर्ड भी बनाए जा रहे हैं, जिससे कार्यभार बढ़ता है। ऐसे में ऑफलाइन सुविधा को मजबूत करने और डेटा की विश्वसनीयता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि पूरी तरह डिजिटल प्रणाली को अपनाया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि पोषण निगरानी ऐप केवल डेटा संग्रह का माध्यम नहीं, बल्कि कुपोषण के खिलाफ एक प्रभावी हथियार बन सकता है। सही उपयोग और निरंतर सुधार के जरिए यह बच्चों के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।


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