वाराणसी, 17 अप्रैल : निजी विद्यालयों में फीस, किताब और यूनिफॉर्म को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 के तहत गठित जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में स्पष्ट किया गया कि नियमों के विपरीत किसी भी प्रकार की शुल्क वृद्धि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में सभी स्ववित्तपोषित विद्यालयों को निर्देश दिया गया कि वे पिछले तीन शैक्षणिक वर्षों की शुल्क संरचना और अपने ऑडिटेड वित्तीय विवरण प्रस्तुत करें, ताकि अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप उनकी जांच की जा सके। प्रशासन ने कहा कि शुल्क वृद्धि केवल निर्धारित मानकों और औचित्य के आधार पर ही मान्य होगी।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई विद्यालय निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वृद्धि करता है या अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक भार डालता है, तो उसके विरुद्ध अधिनियम के तहत जुर्माना सहित कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही विद्यालयों को शुल्क निर्धारण में पारदर्शिता बनाए रखने और अभिभावकों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अभिभावकों की सुविधा के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कंट्रोल रूम (0542-2509413) स्थापित किया गया है, जहां फीस, यूनिफॉर्म या किताबों से संबंधित शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा विद्यालयों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी छात्र को किसी विशेष दुकान से पुस्तक, जूते, मोजे या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए। साथ ही पांच निरंतर शैक्षणिक वर्षों के भीतर विद्यालय पोशाक में परिवर्तन नहीं किया जाएगा और शुल्क वृद्धि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के निर्धारित मानकों के भीतर ही रखी जाएगी।
प्रशासन ने यह भी कहा कि विद्यालयों का नियमित औचक निरीक्षण किया जाएगा तथा अभिभावकों और छात्रों से फीडबैक लेकर व्यवस्था की निगरानी की जाएगी। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।