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वाराणसी। युवती से दुष्कर्म करने और अश्लील वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी देने के चर्चित मामले में वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बंजरवां, फूलपुर निवासी आरोपी अजय यादव को आरोप सिद्ध न होने पर संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव की प्रभावी पैरवी चर्चा में रही। उनके साथ अधिवक्ता बृजपाल सिंह यादव गुड्डू, नरेश यादव और संदीप यादव ने भी अदालत में पक्ष रखा।
क्या था मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, गाजीपुर के कारिन्दीपुर की रहने वाली पीड़िता ने फूलपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि अजय यादव ने पीड़िता के विवाह से पहले उसके छोटे भाई को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया और उसका अश्लील वीडियो बना लिया।
इसके बाद आरोपी कथित रूप से वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लगातार पीड़िता का शोषण करता रहा। विवाह के बाद भी आरोपी द्वारा ब्लैकमेल कर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाने का आरोप लगाया गया था।
पीड़िता ने सामाजिक दबाव के कारण लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी, लेकिन जब कथित उत्पीड़न बढ़ा तो उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
अदालत ने क्या कहा
फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) के न्यायाधीश सुनील कुमार ने अपने फैसले में कहा कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट है कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
अदालत ने यह भी कहा कि एक मात्र साक्ष्य के आधार पर दोषसिद्धि तभी संभव है, जब वह साक्ष्य पूरी तरह विश्वसनीय और बेदाग हो। इस मामले में ऐसा नहीं पाया गया।
फैसला
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष ठोस और निर्विवाद साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा है। ऐसे में आरोपी अजय यादव को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
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