सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला-पत्रकारों के स्रोत सुरक्षित, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मिली संवैधानिक ढाल
नई दिल्ली (एजेंसी)। ने पत्रकारों की स्वतंत्रता को लेकर एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पुलिस अधिकारी किसी पत्रकार से उसके खबरों के स्रोत (सूत्र) के बारे में जानकारी नहीं मांग सकता।
अदालत ने कहा कि यह अधिकार भारतीय संविधान के के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। साथ ही का हवाला देते हुए कोर्ट ने नागरिक अधिकारों की सुरक्षा पर भी जोर दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हाल के समय में बिना पर्याप्त साक्ष्य के पत्रकारों पर मुकदमे दर्ज करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। यह न केवल अनुचित है बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा भी है। कोर्ट ने साफ किया कि न सिर्फ पुलिस, बल्कि अदालत भी किसी पत्रकार को उसके स्रोत उजागर करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती।
यह निर्णय मीडिया जगत के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। के तहत की धारा 15(2) में पहले से ही पत्रकारों को अपने स्रोतों को गोपनीय रखने का अधिकार दिया गया है। हालांकि यह प्रावधान सीधे न्यायालय में बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह पत्रकारिता की नैतिक और पेशेवर स्वतंत्रता का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लोकतंत्र में प्रेस की भूमिका को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। यह स्पष्ट संदेश देता है कि पत्रकारिता देश का चौथा स्तंभ है और उस पर अनावश्यक दबाव या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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