MENU

वाराणसी में ‘सम्राट विक्रमादित्य महोत्सव 2026’ का भव्य आगाज, योगी-मोहन यादव ने किया उद्घाटन



 04/Apr/26

वाराणसी | 3 अप्रैल 2026 धार्मिक नगरी वाराणसी में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महोत्सव 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्घाटन योगी आदित्यनाथ और डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, इतिहास और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

भव्य महानाट्य ने जीवंत किया प्राचीन भारत

बीएलडब्ल्यू स्थित सूर्य सरोवर मैदान में आयोजित इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण सम्राट विक्रमादित्यमहानाट्य रहा। 225 से अधिक कलाकारों, हाथी-घोड़ों, रथों और हाईटेक लाइट-साउंड इफेक्ट्स के साथ मंचित इस नाट्य ने दर्शकों को प्राचीन भारत के स्वर्णिम युग में पहुंचा दिया।

तीन विशाल मंचों पर एक साथ विभिन्न दृश्य प्रस्तुत किए गए, जिनमें विक्रम-बेताल की कथा, सम्राट के जीवन की प्रमुख घटनाएं और सनातन संस्कृति का उत्कर्ष दर्शाया गया।

योगी आदित्यनाथ का संबोधन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य न्याय, धर्म और लोककल्याण के प्रतीक थे और उनका जीवन सभी के लिए प्रेरणादायक है।

उन्होंने यह भी बताया कि काशी विश्वनाथ धाम के विकास के बाद वाराणसी में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मोहन यादव ने की ऐतिहासिक विरासत की सराहना

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के महान शासक थे, जिनकी कीर्ति आज भी जनमानस में जीवित है।
उन्होंने भगवान श्रीराम-लक्ष्मण, भगवान श्रीकृष्ण-बलदाऊ और भर्तृहरि-विक्रमादित्य की जोड़ी का उल्लेख करते हुए भारतीय परंपरा की महानता को रेखांकित किया।

महाकाल की भस्म आरती और सांस्कृतिक झलकियां

कार्यक्रम की शुरुआत महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती की झलक और वैदिक मंत्रोच्चार से हुई, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

विशेष आकर्षण: 700 किलो की वैदिक घड़ी

कार्यक्रम के दौरान डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 700 किलोग्राम की विक्रमादित्य वैदिक घड़ीभेंट की, जिसे बाद में काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित किया जाएगा।

दर्शकों के लिए बना लाइव इतिहास

तीन मंच, 18 घोड़े, 2 रथ, 4 ऊंट और हाथी के साथ प्रस्तुत इस भव्य नाट्य को दर्शकों ने लाइव इतिहास की किताबबताया। हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने इसे अविस्मरणीय अनुभव बताया।

सांस्कृतिक संदेश

यह महोत्सव केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि

  • न्याय सर्वोपरि है
  • शासक का कर्तव्य प्रजा की सेवा करना है
  • ज्ञान और संस्कृति का संरक्षण आवश्यक है

पर्यटन और संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा

दोनों राज्यों की सरकारें-उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश-सांस्कृतिक और पर्यटन विकास के लिए मिलकर काम कर रही हैं। इस तरह के आयोजन एक भारत, श्रेष्ठ भारतकी भावना को भी मजबूत करते हैं।

 


इस खबर को शेयर करें

Leave a Comment

2812


सबरंग