जमीनी जुड़ाव, जनसेवा और सियासी सक्रियता से मजबूत होती पहचान
चंदौली/सैयदराजा। जनपद चंदौली के बरहनी ब्लॉक के डेढ़गावा गांव (पोस्ट जलालपुर) से आने वाले चंदन सिंह राजपूत क्षेत्र में तेजी से उभरते जननेता के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। भारतीय सेना में करीब 18 वर्षों तक सेवा देने के बाद उन्होंने समाज सेवा और राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की है।
26 मार्च 1985 को एक सामान्य परिवार में जन्मे चंदन सिंह राजपूत ने शुरुआती दौर में ही चुनौतियों के बीच अपनी शिक्षा पूरी की। इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन के साथ सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसने उनके व्यक्तित्व में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और दृढ़ता को मजबूत किया।
वर्ष 2002 में भारतीय सेना में भर्ती होकर उन्होंने देश की सेवा की। कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक कर्तव्य निभाने के बाद सेवानिवृत्ति के पश्चात उन्होंने अपने अनुभव को समाजहित में लगाने का निर्णय लिया।
सेना से लौटने के बाद उन्होंने निषाद पार्टी से जुड़कर राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी शुरू की। वर्तमान में वे पार्टी के क्षत्रिय प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष और वाराणसी मंडल के सह-कोऑर्डिनेटर के रूप में कार्यरत हैं। संगठन विस्तार के लिए वे लगातार गांवों में जाकर जनसंवाद कर रहे हैं और स्थानीय समस्याओं को उठाने का प्रयास कर रहे हैं।
उनकी प्राथमिकताओं में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सड़क और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे शामिल हैं। क्षेत्र में उनकी सभाओं में बढ़ती भीड़ और जनसमर्थन उनकी सक्रियता को दर्शाता है।
चंदन सिंह राजपूत का सरल व्यवहार और आम लोगों से सीधा संवाद उनकी पहचान को मजबूत बना रहा है। वे विभिन्न समुदायों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनते हैं और समाधान के लिए पहल करते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पूर्वांचल की राजनीति में उनका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है। सूत्रों के मुताबिक, वे सैयदराजा विधानसभा सीट से निषाद पार्टी के टिकट पर दावेदारी कर सकते हैं।
सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र में निषाद, बिंद और मल्लाह समुदाय के बड़ी संख्या में मतदाता हैं, जिनके साथ अन्य वर्गों का वोट बैंक चुनावी समीकरण को प्रभावित करता है। ऐसे में यह सीट आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सेना से समाज सेवा और फिर राजनीति तक का सफर चंदन सिंह राजपूत को एक ऐसे चेहरे के रूप में स्थापित कर रहा है, जिस पर आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति की दिशा निर्भर कर सकती है।