वाराणसी। काशी के मानसरोवर तीर्थ क्षेत्र में आयोजित श्री रामराज्य पट्टाभिषेक महोत्सव के छठवें दिन की विशेष आहुतियां पवनपुत्र हनुमान की यशोगाथा को समर्पित रहीं। पट्टाभिषेक अनुष्ठान के समानांतर रामालय मंडप वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड के मधुर और भावपूर्ण श्लोकों से गूंजता रहा।
यज्ञ महोत्सव के मुख्य आचार्य उलिमिरी सोमयाजुलू ने कहा कि वाल्मीकि रामायण के इस सर्ग में सब कुछ सुंदर है, इसलिए इसका नामकरण भी सुंदरकांड हुआ। उन्होंने बताया कि माता सीता की खोज में निकले हनुमानजी ने अशोक वाटिका में अशोक वृक्ष पर बैठे-बैठे माता जानकी को विश्वास दिलाने के लिए श्रीराम के स्वरूप, गुण और सौंदर्य का जो अनुपम नख-शिख वर्णन किया, उससे अधिक सुंदर चित्रण त्रैलोक्य में दुर्लभ है।
उन्होंने कहा कि लंका दहन के बाद जब हनुमानजी माता जानकी की चूड़ामणि लेकर प्रभु श्रीराम के पास लौटे और वैदेही के सतीत्व, धैर्य और विरह का संदेश सुनाया, तब कपि की शूरवीरता से भावविभोर रघुवीर ने जिस आत्मीयता से उन्हें हृदय से लगाया, वह दृश्य सृष्टि के सबसे सुंदर क्षणों में गिना जा सकता है।
महोत्सव के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए रामायण मर्मज्ञों ने सुंदरकांड का संपूर्ण पारायण संपन्न किया। अब बुधवार को लंकाकांड का संपूर्ण पारायण किया जाएगा।
उत्सव के यज्ञ मंडप के समस्त अनुष्ठान यज्ञ के मुख्य ऋत्विज वी.वी. सुंदर शास्त्री ने संपन्न कराए। कार्यक्रम का संयोजन आश्रम के प्रबंधक वी.वी. सीताराम ने किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से सी.वी.बी. सुब्रह्मण्यम, बुधा शर्मा, श्याम शास्त्री, एन. रामचंद्र मूर्ति, श्रीमती वेमुरी उमा, धारणिया और रुक्मिणी जी उपस्थित रहीं।