फर्जी दस्तावेजों के जरिए पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा को 1036.43 करोड़ रुपये की चपत लगाने का आरोप, सीबीआई कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
वाराणसी: फर्जी दस्तावेजों के जरिए पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा को 1036 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाने के आरोपित जीवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज के निदेशक आदर्श झुनझुनावाला की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है। यह आदेश सीबीआई की विशेष न्यायाधीश मधु डोगरा ने दिया।
कोर्ट में सीबीआई की ओर से बताया गया कि बैंक ऑफ बड़ौदा, वाराणसी के सहायक महाप्रबंधक प्रतीक अग्निहोत्री ने 2 सितंबर 2019 को बैंक से धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और कूटरचना की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि जीवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज के चेयरमैन, निदेशकों, गारंटर, मेसर्स सिंह दीक्षित एंड कंपनी, मेसर्स स्पर्श एंड कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत अन्य अज्ञात व्यक्तियों ने मिलकर धोखाधड़ी की, जिससे पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा को 1036 करोड़ 43 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
1989 में बनी थी कंपनी, 2008 में बदला गया नाम
सीबीआई की विवेचना में सामने आया कि संबंधित कंपनी की स्थापना 17 नवंबर 1989 को मेसर्स झुनझुनावाला वनस्पति के नाम से हुई थी। शुरुआती दौर में कंपनी छोटे स्तर पर कार्य करती थी। बाद में वर्ष 2008 में इसका नाम बदलकर जीवीएल एग्रो कर दिया गया।
बोगस एंट्रीज और फर्जी खरीद-बिक्री का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार कंपनी खाद्य तेल के कारोबार से जुड़ी थी। वर्ष 2007 में आरोपी आदर्श झुनझुनावाला को कंपनी में सहायक निदेशक बनाया गया। आरोप है कि कंपनी ने बोगस एंट्रीज के जरिए अन्य कंपनियों को फर्जी बिक्री दर्शाई और कई कंपनियों से खाद्य तेल व पाम ऑयल की फर्जी खरीद दिखाई।
चार्जशीट में फंड ट्रांसफर और बैंकिंग तंत्र के दुरुपयोग का जिक्र
चार्जशीट के मुताबिक अन्य companies से करोड़ों रुपये का फंड ट्रांसफर कर दोबारा जीवीएल एग्रो को भुगतान दिखाया गया। इस पूरी प्रक्रिया में बैंकिंग तंत्र के इस्तेमाल का भी आरोप है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने आदर्श झुनझुनावाला की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।